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आवास घोटाला: जांच के घेरे में 150 से अधिक गांव

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ज्ञानपुर(भदोही)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना में व्यापक स्तर पर हुए भ्रष्टाचार ने प्रशासनिक अफसरों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक-एक करके ज्यादातर गांवों में जांच की आंच पहुंचने लगी है। छह ब्लॉकों के करीब 150 से अधिक गांवों में आवास आवंटन की प्रक्रिया जांच के घेरे में आ गई है। वर्तमान में 22 गांवों की जांच चल रही है, जबकि पांच गांवों में धांधली पकड़ी जा चुकी है।100 से अधिक अपात्र चिह्नित कर उनसे रिकवरी की प्रक्रिया चल रही है।
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आजादी के बाद से ही आवासविहीन लोगों को आवास मुहैया कराने की मुहिम चल रही है। सभी सरकारों ने इस पर काम किया, लेकिन आजादी के छह दशक के बाद भी आबादी के एक बड़े हिस्से को पक्का मकान मयस्सर नहीं हो सका है। छप्पर, कच्चे घर में रहने वाले गरीबों को आवास मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू किया गया। वित्तीय वर्ष में छह ब्लॉकों के 561 गांवों में 5200 लाभार्थियों को चिह्नित कर आवास देने थे। जिला प्रशासन के निर्देश पर सेक्रेटरी और ग्राम प्रधानों ने पंचायत स्तर से सूची बनाकर ब्लॉक को भेजी, जिसके बाद लाभार्थियों का चयन किया गया। चयन के बाद प्रशासन की ओर से पहली किस्त के तौर पर लाभार्थियों के खाते में 40-40 हजार रुपये भी भेज दिए गए। आवास आवंटन में की गई गड़बड़ी की पोल तब खुलनी शुरू हुई जब जांच होने लगी। सुरियावां के बहुता चकडाही, डंगहर, भोरी, अभोली के गड़ौरा, गंगारामपुर समेत कई गांवों में अपात्र पकड़े गए, जिनसे रिकवरी करने का निर्देश भी दिया गया। अब तक तीन ब्लॉक के छह से सात गांव में ही 100 से अधिक अपात्र पकड़े जा चुके हैं। जबकि डीघ के रजमला, ज्ञानपुर के गोपीपुर समेत 20 से अधिक गांवों की जांच चल रही है। खंड विकास अधिकारियों की जांच में जिस तरीके से अपात्र पकड़े जा रहे हैं उसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
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