ज्ञानपुर। अप्रैल में ही गर्मी अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है। विकट गर्मी से पानी की समस्या गहराने लगी है। प्रचंड गर्मी में नदियां और तालाब सूख गए हैं, नहरों में धूल उड़ रही है। राजकीय नलकूपों की हालत बेहद खस्ता है। ऐसे में एक तरफ जहां किसानों के सामने मूंग, उड़द संग सब्जी की बुवाई की समस्या खड़ी हो गई है, वहीं दूसरी ओर जलाशय सूखने से पशु-पक्षियों के सामने पेयजल संकट पैदा हो गया है। नदी के किनारे के गांवों में सियार और नीलगाय जैसे जंगली जानवर हलक तर करने के लिए गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।
भदोही जिले में सिंचाई के लिए करीब 236 किमी परिक्षेत्र में नहरों का जाल फैला है। साथ ही 535 राजकीय नलकूप स्थापित हैं। नहरों से जहां 15 हजार हेक्टेयर रकबे की सिंचाई होती है, वहीं आठ से 10 हजार हेक्टेयर सिंचाई नलकूप से होती है। लगभग 80 फीसदी कृषि भूमि की सिंचाई इन्हीं दोनों सिंचाई के साधनों के जरिए की जाती है। मार्च महीने से सूखी नहरों और तालाबों में धूल उड़ने लगी है। नहरें जहां सूखी पड़ी हैं, वहीं करीब 70 से अधिक राजकीय नलकूप तकनीकी खराबी से बंद चल रहे हैं। इससे सब्जी की खेती करने वाले किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वरुणा और मोरवा नदी भी पूरी तरह सूख चुकी हैं। तालाबों की भी यही हालत है। जिले में करीब दो हजार तालाब हैं, जिनमें 90 फीसदी पूरी तरह सूख गए हैं। इन जलाशयों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। यही नहीं, भूजल स्तर घटने से कुओं की भी तलहटी दिखने लगी है। तमाम बहुत से हैंडपंपों ने भी पानी देना बंद कर दिया है, जो हैंडपंप खराब थे। तालाबों के सूखने से 42 डिग्री तापमान में पशु-पक्षियों के लिए सबसे अधिक समस्या उत्पन्न हो गई है। अधिशासी अभियंता नलकूप नंदलाल ने कहा कि 535 राजकीय नलकूपों में 10 से 15 खराब हैं। कुछ नलकूपों का ट्रांसफार्मर या बिजली की समस्या है। उसको ठीक करने के लिए बिजली विभाग को पत्र लिखा गया है। जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि गांवों में 480 हैंडपंप रिबोर लायक थे। जिनमें 200 के करीब हैंडपंपों का रिबोर किया जा चुका है। जो बचे हैं उनका रिबोर 30 अप्रैल तक पूर्ण कर लिया जाएगा। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि नहरों से तालाबों को भरने का निर्देश नहर विभाग को दिया जाएगा। ताकि पशु-पक्षियों को सहूलियत मिल सके।