सीतामढ़ी। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का भदोही के धार्मिक और पर्यटन स्थली में जनसभा के साथ महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली में जगत जननी माता सीता के आंचल तले रात्रि प्रवास अहम माना जा रहा है। उन्होंने अपने सीतामढ़ी में भव्य कार्यक्रम और जनसभा से पूरे पूर्वांचल की राजनीति को साधने का प्रयास किया।
प्रियंका गांधी का कार्यक्रम वैसे तो चुनावी था, लेकिन कार्यक्रम की रूपरेखा में जो रणनीति तय की गई थी, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गंगा मैया ने मुझे बुलाया है ...बात की काट माना जा रहा है। यहां खास बात यह भी है कि प्रियंका गांधी मां गंगा के रास्ते चल कर मां सीता की पावन स्थली में उनके आंचल तले रात गुजारी। हालांकि उन्होंने गंगा के बदहाली के बारे में कुछ भी नही बोला। यह महज संयोग ही है कि गोस्वामी तुलसी दास जी गंगा यात्रा के दौरान सीतामढ़ी में गंगा तट पर वट बृक्ष के नीचे रात्रि विश्राम किया था। वही बर्ष 1995 में स्वामी जितेंद्रा नंद तीर्थ ने गंगा यात्रा के दौरान सीतामढ़ी पहुंचे और ऊपरी शक्ति ने उन्हें यहां रुकने का आदेश दिया। बाद में स्वामी जी के प्रेरणा से दिल्ली के उद्योगपति पंडित सत्यनारायण प्रकाश पुंज ने सीतामढ़ी का बहुमुखी विकास किया। वैसे तो इस स्थल पर देश विदेश की तमाम जानी मानी हस्तियां आती जाती है लेकिन देश के गांधी परिवार की किसी भी शख्शियत का पहली बार आगमन और रात्रि निवास के न सिर्फ कई मायने निकाले जा रहे है बल्कि सीतामढ़ी सहित भदोही के जनपद सर्वांगीड़ विकास के लिए प्रियंका गांधी का आगमन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बारे में गेस्ट हाउस के प्रबंधक कैलाश चंद्र ने कहा कि प्रियंका जी जैसी हस्ती की मेहमान वाजी मेरे लिए गौरव की बात है।श्री मती गांधी ने महज 10 मिनट के भाषण में उन्होंने गरीब, मजदूर, किसान, युवा , बुनकर आदि की समस्याओं को फोकस करते हुए बीजेपी सरकार पर प्रहार किया।