ऊंज। एक ओर जहां केंद्र और प्रदेश की सरकारें किसानों की माली हालत सुधारने के लिए योजनाओं की सौगात दे रहीं हैं तो वहीं विभागीय अधिकारियों पर इसका कोई असर दिखाई नहीं पड़ रहा है। समस्याएं सुरसा की तरह मुंह खोले कृषकों की दशा बिगाड़ने पर आमादा हैं। हर जगह-जगह मनमानी और लापरवाही दयनीय दिशा की ओर इशारा करती है। कुछ ऐसा ही नजारा विकास डीघ के दरवांसी गांव में स्थापित राजकीय नलकूप संख्या एक पर देखने को मिला, जहां नलकूप तो चल रहा है, लेकिन खेतों तक पानी पहुुंचाने वाली नालियां जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गई हैं।
किसान शिवराज सिंह, भूलन पासी, शिवपूजन सिंह, सुनील सिंह, राकेश सिंह, मो. इश्तियाक, अनीस, नारदमुनि, पवन सिंह, रामसागर आदि ने आरोप लगाया कि जब भी सिंचाई का समय आता है तब-तब लोग नालियों की दशा देखकर शासन-प्रशासन को कोसना शुरू कर देते हैं। यह कोई एक सीजन की बात नहीं, बल्कि सभी सीजन की फसलों की सिंचाई के समय बना रहता है। यह भी नहीं कि मामला विभाग के संज्ञान में नहीं है। सिंचाई समिति और किसानों के साथ जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ होने वाली बैठकों में भी मामला उछाल मारता है, लेकि न अधीनस्थों से समस्या निवारण के आदेश का फरमान बाहर निकलने के बाद हवाहवाई हो जाता है। जबकि उक्त नलकूप की स्थापना तीन गांवों की सीमा पर इसीलिए करवाया गया था कि संबंधित कृषकों को सिंचाई की समस्या से मुक्ति मिल सके। स्थापना काल के कुछ समय बाद से ही पश्चिमी और पूर्वी छोर के किसानों को जोड़ने वाली नाली अति जर्जर होकर पटान का रूप लेती जा रहीं हैं। मौखिक एवं लिखित रुप में दर्जनों बार विभाग को अवगत कराने के बाद भी किसानों को राहत नहीं दिलाई जा सकी। इसके चलते जहां सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसलें सिंचाई के अभाव में दम तोड़ने को विवश हो रही हैं। अब इंतजार की घड़ी आक्रोश का रुप धारण करती जा रही है। क्षति ग्रस्त नाली का नि र्माण की ओर पहल न होने पर कि सी भी कि सान जि लाधि कारी का घेराव कर विभागीय कारगुजारी की पोल खोलेंगे।