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स्कूलों में आग लगी तो बचना मुश्किल

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ज्ञानपुर। कभी किसी कारणवश स्कूलों में आगजनी की घटना हो जाए तो सुरक्षा के इंतजाम नहीं होना भारी पड़ सकता है। जिले के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में आग से बचाव के लिए लगे अग्निशमन यंत्रों में 70 फीसदी से अधिक रीफिलिंग नहीं होने से वे बेकार हो चुके हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ गिने-चुने कान्वेंट विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो अन्य विद्यालयों में अगिनशमन यंत्र समेत अन्य जरूरी उपकरण ही नहीं है। जिले में 1143 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा 500 मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित होते हैं। इन विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर अग्निशमन यंत्र, बालू, बाल्टी आदि रखी जाती है। ताकि कभी भी आग लगने के दौरान इनका उपयोग किया जा सके। बावजूद इसके जिले में ज्यादातर विद्यालयों में अनिशमन यंत्र बेकार हो चुके हैं। यंत्रो में भरी जाने वाली गैस एक तय समय तक ही चलती है। निर्धारित समय पूरा होने के बाद वह किसी काम की नहीं रह जाती। परिषदीय विद्यालयों में कुछ साल पहले अग्निशमन यंत्र लगाए गए थे। हालांकि तीन से चार साल बाद सभी बेकार हो चुके हैं। चौरी के प्राथमिक विद्यालय रोटहां, मानिकपुर, ज्ञानपुर के पुरानी देहाती, ज्ञानपुर प्रथम समेत अन्य विद्यालयों में यंत्र तो लगे हैं पर वे दो से तीन साल पुराने हैं।
कुछ विद्यालय के शिक्षकों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर इसे लेकर संजीदा नहीं हैैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर संजीदा विद्यालय ही नियमित ढंग से उसकी रीफिलिंग कराते हैं। निजी कान्वेंट स्कूल फीस के नाम पर तो मोटी रकम वसूल रहे हैं, मगर छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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सरकारी और प्राइवेट सभी विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र जरूरी हैं। कुछ स्कूल हर साल रीफिलिंग कराते हैं, लेकिन ज्यादातर में दो से तीन साल पूर्व लगे यंत्र चलाए जा रहे हैं। समय-समय पर इसकी निगरानी की जाती है।
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अनिल प्रताप, अग्निशमन अधिकारी ज्ञानपुर

अग्निशमन यंत्र सभी विद्यालयों में लगाए गए हैं। हर साल उसकी रीफिलिंग के लिए कहा जाता है। खंड शिक्षा अधिकारियों से कहकर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएगी।
अमित कुमार, बीएसए भदोही
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