ज्ञानपुर/दुर्गागंज। इस बार की भारी बारिश निचले इलाके के किसानों के लिए आफत बनकर आई है। दुर्गागंज क्षेत्र के लगभग दो सौ किसानों की पांच सौ बीघे से अधिक फसल पानी में डूबे रहने के कारण नष्ट हो गई। इसमें बारिश के अलावा नहर के कमजोर बंधे भी मेहनतकशों के लिए मुसीबत का सबब बने हैं। कई किसानों की रोपाई से पहले ही धान की नर्सरी पूरी तरह पानी में डूबे रहने से सड़ कर नष्ट हो गई।
पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक आपदा झेल रहे किसानों को इस बार भी इससे राहत मिलती नहीं दिख रही है। डीघ, औराई और अभोली ब्लॉक के तमाम निचले इलाकों में सैकड़ों एकड़ खेत बारिश और नहर के पानी से जलमग्न हो गए हैं। पिछले वर्ष तूफान, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि के कारण कई महीनों तक खेतों में घुटने तक पानी लगे रहने के कारण धान और गेहूं की उपज गवां चुके किसानों को इस बार फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जलनिकासी की व्यवस्था न होने के कारण बारिश का पानी खेतों में ठहरकर किसानों की उम्मीद को डुबो रहा है। बानगी के तौर पर अभोली ब्लॉक क्षेत्र के रामचंद्रपुर, अमिलहरा और आनापुर गांवों को लिया जा सकता है। यहां के लगभग 200 किसानों के 500 बीघे से अधिक धान की फसल पानी में डूब गई है। यहां नहरों के कमजोर तटबंध भी आए दिन टूटकर खेतों को डुबोते रहते हैं। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इससे पहले धान की फसल प्राकृतिक आपदा में बर्बाद हो गई थी। खेतों में लगातार पानी रहने के कारण रबी के सीजन में गेहूं की बुआई नहीं हो पाई। इस बार शुरुआती चरण में ही धान की फसल समाप्त होती दिख रही है। किसानों का कहना है कि रोपाई के बाद से ही फसल लगातार पानी में डूबी है। इसका कारण नहर भी है, जिसे अक्सर बरसात के दिनों में कुछ लोग तोड़ देते हैं। इससे निचले इलाके में पानी जमा हो जाता है। क्षेत्र के किसान सुभाषचंद बिंद, मनीष बिंद, हरिशंकर बिंद, रमेशचंद शुक्ला, सिंटू शुक्ला, मानिकचंद सरोज आदि ने इस समस्या पर चिंता जताते हुए प्रशासन से पक्की नहर बनवाने की मांग की, ताकि भविष्य में फसल डूबकर नष्ट न हो।
रोपाई से पहले ही नष्ट हो गई नर्सरी
ज्ञानपुर। निचले इलाके के गांवों में खेतों में भारी जलजमाव किसानों को खून के आंसू रुला रहा है। ज्ञानपुर नगर से लगे भिदिउरा गांव का सिवान बारिश के पानी से लबालब है। इस बार अप्रैल की शुरुआत से ही बारिश शुरू हो जाने से रोपाई का मौका नहीं मिला और नर्सरी खेत में ही सड़कर नष्ट हो गई। गांव के अवध नारायण सरोज ने धान की रोपाई के लिए नर्सरी डाली थी, लेकिन वह पानी में ही डूबी रह गई। खेत को सूखने का मौका नहीं मिला। ना ही धान की रोपाई हो पाई। उनका कहना है कि ऐसे में अनाज की जरूरत की पूर्ति कैसे होगी, चिंता का विषय हो गया है।
विभिन्न इलाकों में काफी फसल डूबी है। हालांकि धान की फसल के लिए अभी ज्यादा दिक्कत नहीं है। मगर आगे भी पानी नहीं सूखता और फसल खराब हो जाएगी तो उसका आकलन करवाकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
राजेंद्र प्रसाद, जिलाधिकारी