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बैंकों में हड़ताल से पचास करोड़ का लेनदेन प्रभावित

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बैंकों के निजीकरण के विरोध तथा सरकारी बैंकों को सुदृढ़ किए जाने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन और यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के हड़ताल का व्यापक असर रहा। हड़ताल से राष्ट्रीयकृत बैंकों के ताले नहीं खुले। निजी बैंक भी आंशिक रूप से हड़ताल में शामिल रहे। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के सदस्यों ने हमेशा की तरह पंजाब नेशनल बैंक शाखा के बाहर नारेबाजी कर किया। हड़ताल से जिले भर में 50 करोड़ की क्लीयरिंग और लेनदेन प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
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यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिला मंत्री अजय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार सारा दोष बैंक कर्मियों पर मढ़ रही है। बैंकों का निजीकरण करना इस समस्या का समाधान नहीं है। हमने 1960 के दशक से बैंकिंग व्यवस्था की समीक्षा में पाया है कि निजी बैंक हमेशा से फेल हुए हैं। आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में आंकड़े उठा कर देखें तो सरकार की कमियों के चलते बैंकों को नुकसान हुआ है, लेकिन नुकसान के लिए बैंक कर्मियों पर दोषारोपण कर निजीकरण करने का हथकंडा अपनाया जा रहा है, जो गलत है। बृहस्पतिवार को सुबह पीएनबी शाखा के बाहर जुटे बैंक कर्मियों ने हड़ताल की रणनीति पर विचार विमर्श किया। इस दौरान बैंकिंग व्यवस्था में वास्तविक समस्याओं की पर्ची लोगों में बांटी गई। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बैंकों के निजीकरण बंद करने की मांग की। जिला मंत्री ने बताया कि जिले में कम से कम 50 करोड़ रुपये के चेकों की क्लीयरिंग और लेनदेन प्रभावित रहा। प्रदर्शन में अनिल मिश्रा, राकेश कुमार, शानू खां, कमलेश मौर्या, सुरेश यादव, सगीर अहमद, सतीश चंद पांडेय, रविकांत शुल्का, मुख्तार अली, पवन कुमार यादव, सुशील शुक्ला, रिजवान अहमद, अनिल तिवारी, प्रिंस कुमार, चिंतामणि, हबीबुर्रहमान, अनिल द्विवेदी, संतलाल आदि शामिल रहे।
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