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प्रधानमंत्री मातृत्व योजना से 49 हजार महिलाएं हुईं लाभान्वित

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गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर सरकार गंभीर है। इसके लिए कुछ जरूरी बिंदुओं का खास ख्याल जाए तो जच्चा-बच्चा को सुरक्षित रखा जा सकता है। सरकार की मंशा को फलीभूत करने के लिए 2017 में शुरू की गई प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना गर्भवती माताओं के लिए सहायक बन गई। पांच साल के दौरान जिले की 49 हजार से अधिक गर्भवती धात्री और माताओं को योजना का लाभ मिल चुका है।
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मातृ और शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है, और लाभार्थी उसका लाभ ले रही हैं। जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना भी इसमें काफी सहायक साबित हुई है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत गर्भवती महिला को तीन चरणों में पांच हजार रुपये दिए जाते हैं। गर्भ धारण से लेकर बच्चे के छह महीने तक होने तक यह रकम मिलती है। ताकि जच्चा-बच्चा स्वस्थ रह सकें। सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक का कहना है कि योजना महिलाओं के लिए काफी सहायक साबित हुई है। गर्भवती को प्रसव पूर्व मुफ्त जांच के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जाता है। महीने की नौ तारीख को जांच होती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर महिला को जरूरी दवाएं भी दी जाती हैं। तीन चरणों में पांच हजार रुपये देने के साथ ही जननी सुरक्षा योजना में भी एक हजार से 1400 रुपये तक दिए जाते हैं।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अमित कुमार दुबे का कहना है कि आशा कार्यकर्ता इस योजना के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना है कि मां-बच्चे को सुरक्षित करने का पहला कदम यह होना चाहिए कि गर्भावस्था के तीसरे-चौथे महीने में प्रशिक्षित चिकित्सक से जांच अवश्य करानी चाहिए, ताकि किसी भी दिक्कत का पता चलते ही उसका समाधान हो सके। उन्होंने सुझाव दिया कि गर्भवती खानपान का खास ख्याल रखें और खाने में हरी साग-सब्जी, फल आदि का ज्यादा इस्तेमाल करें। आयरन और कैल्शियम की गोलियों का सेवन चिकित्सक के बताए के अनुरूप करें। प्रसव का समय नजदीक आने पर सुरक्षित प्रसव के लिए पहले से ही निकटतम अस्पताल का चयन कर लेना चाहिए। इसके साथ ही मातृ-शिशु सुरक्षा कार्ड, जरूरी कपड़े और एंबुलेंस का नंबर याद रखना चाहिए। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना 2017 में शुरू की गई थी। मार्च 2022 तक कुल 57 हजार से अधिक आवेदन आए। इसमें से 49 हजार 166 महिलाओं को योजना का लाभ दिया गया। इस पर सरकार की तरफ से 24 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि खर्च की गई है।
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