ज्ञानपुर। जिले में पौधरोपण अभियान के जरिए हरियाली बिखेरने के दावे लापरवाही की आंच में झुलसकर मुरझा गए हैं। पिछले जुलाई-अगस्त में कराए गए वृहद पौधरोपण अभियान के तहत लगाए गए 40 फीसदी से अधिक पौधे सूख गए। इससे पौधरोपण अभियान को झटका लगता दिख रहा है। पौधों की सुरक्षा के भी इंतजाम नहीं हैं।
भदोही जिले में पर्यावरण संरक्षण अभियान की हालत पतली है। कागजों पर बिखेरी गई हरियाली फिर उजड़े चमन में तब्दील हो गई है। माहभर पूर्व रोपे गए 10.35 लाख पौधों में अधिकतर सूख गए या मवेशियों का निवाला बन गए। विभाग का मानना है कि 10 फीसदी पौधे सूखते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। जनपद में पहले से ही वन क्षेत्र शून्य है। वन विभाग की निगरानी में 2019 में 17 लाख से अधिक पौधे रोपे गए, जबकि 2020 में 10.35 पौधों का रोपण किया गया। एक दशक के आंकड़ों पर गौर करें तो एक करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए, लेकिन इनमें से बड़ी तादाद में पौधे सूख गए। जमीन के अभाव में पौधरोपण कर पाने में फिसड्डी वन विभाग लगाए गए पौधों की भी समुचित देखभाल नहीं कर सका। लिहाजा ट्री-गॉर्ड के अंदर लगाए गए पौधे भी सूख गए। यहां तक कि जिला मुख्यालय पर जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में लगे पौधों को भी नहीं बचाया जा सका। तमाम पौधे पशुओं का निवाला बन गए। बड़ी संख्या में पौधरोपण कागजों पर ही किया गया था, जो आज तक हरियाली नहीं बिखेर सका। इसके लिए अलग-अलग विभागों को लक्ष्य दिए गए थे, जबकि अकेले वन विभाग को 3.85 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला था। जुलाई में एक सप्ताह के अभियान में वन विभाग की ओर से 10.35 लाख पौधे रोपे जाने का दावा किया गया है, हालांकि कई विभागों की ओर से सिर्फ खानापूर्ति ही की गई। 50 से 100 पौधे लगाकर दो से तीन हजार के लक्ष्य को पूर्ण दिखाया गया। सुरक्षा के नाम पर भी कागजी कोरम पूरा किया गया। अफसरों के दफ्तरों के आसपास को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया। ग्राम प्रधानों के जिम्मे मिले पौधे खेतों के आसपास लगाए गए, जिनकी हरियाली चंद दिनों में ही गायब हो गई। डीएफओ आलोक सक्सेना ने कहा कि सुरक्षा-संरक्षा के लिए बजट कम मिलता है। पौधरोपण होने पर कलेक्ट्रेट, विकास भवन आदि क्षेत्रों में लोहे और ईंट के ट्री-गार्ड लगाए गए हैं। सभी को चाहिए पौधों के संरक्षण के लिए जागरूक हों, तभी अभियान शत प्रतिशत सफल हो सकेगा।