ज्ञानपुर/सुरियावां। ज्ञानपुर नगर स्थित मुखर्जी पार्क में आयोजित श्रीराम कथा के नौवें दिन स्वामी निर्मल शरण महाराज ने राजधर्म का मर्म समझाया। कहा कि महलों में रहकर रामराज्य की स्थापना नहीं हो सकती। रामजी ने निषादराज को गले से लगाया, कोल भीलों के बीच बैठे, ऋषि मुनियों का दुख दर्द समझा और शबरी के जूठे बेर खाए। उसके बाद रावण का उद्धार कर रामराज्य की स्थापना की।
प्रभु श्री राम के विजय का कारण भाई लक्ष्मण का साथ होना था, जबकि रावण के हारने का कारण भाई विभीषण का उससे अलग होना रहा। हमेशा व्यक्ति अपनों से ही हारता है। यही वजह है कि हमें हमेशा सुसंगठित और सुव्यवस्थित रहना चाहिए। इस मौके पर मनोज तिवारी, अनिल पांडे, अरविंद तिवारी,रोहित तिवारी, जेसी तिवारी, बिंदु चौरसिया, संतोष उमर वैश्य आदि मौजूद रहे।
सुरियावां संवाददाता के अनुसार सत्संग सेवा मंडल की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित रामकथा में काशी कोकिला सुप्रिया पाठक ने कहा कि कैकेयी का चरित्र निंदनीय नहीं था। मंथरा के चरित्र पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें देखना चाहिए कि हमारे आसपास कौन-कैसे लोग हैं। अक्सर व्यक्ति आज के जीवन में भी अपने आसपास की मंथरा को पहचान नहीं पाता। आत्म मंथन के बिना किसी दूसरे के कहने पर बड़ा फैसला नहीं लेना चाहिए। माता कैकेयी ने मंथरा से प्रेरणा लेकर नहीं बल्कि जनहित में भगवान श्रीराम को वनवास भेजा था। देश और समाज की भलाई के लिए अगर खलनायक का रोल भी करना पड़े तो जरूर करना चाहिए। इस मौके पर प्रदीप दूबे, छेदीलाल, राधेश्याम, दीनानाथ, संतोष, रामेश्वर प्रसाद आदि मौजूद रहे।