तुम मुझे यूं जला न पाओगे...
पुतले ही नहीं समस्याओं के दशानन का दहन करने की जरूरत
अपराध, भ्रष्टाचार, अशिक्षा, कुपोषण और बेरोजगारी बनी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
ज्ञानपुर। बुराई के प्रतीक रावण के पुतले को शुक्रवार को फिर जलाया जाएगा, लेकिन समाज में व्याप्त समस्याओं के रूप में जगह-जगह कुंडली मारकर बैठे रावण से कैसे निपटा जाएगा। वे तो जस के तस रह जाएंगे। अपराध, भ्रष्टाचार, अशिक्षा, कुपोषण और बेरोजगारी समेत तमाम समस्याएं रावण की तरह सभ्य समाज के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इनके स्थायी समाधान के लिए कारगर पहल नहीं हो पा रही है। इन समस्याओं को खत्म करने पर ही समाज की बुराइयां मिटेंगी। एनजीटी की फटकार के बाद भी कालीन उद्योग के केंद्र भदोही जिले में प्रदूषण में कोई कमी नहीं आई।
1. महिला अपराध रोकने में पुलिस विफल
घर से लेकर सड़कों तक महिलाओं के साथ हिंसा और आपराधिक वारदातें सुर्खियां बनती रहती हैं। दो दिन पूर्व ही भदोही नगर की एक सड़क पर छात्रा पर फब्तियां कसने के साथ छेड़खानी का वाकया सामने आया। इसके बाद एक छात्रा के परिजनों को इसमें कूदना पड़ा। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में अकेले शौच जाने वाली युवतियां और महिलाएं छेड़खानी और रेप का शिकार हुईं। पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में हर तीसरे दिन महिला उत्पीड़न और अपराध का शिकार हो रही है।
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2. प्रदूषण बना चुनौती
कुछ दिनों पहले ही एनजीटी ने भदोही नगर प्रशासन को प्रदूषण के मसले पर फटकार लगाई थी। कालीन कारखानों से निकलने वाले खतरनाक रसायनों के नदियों में घुलने से उनके जीवनदायिनी गुण को खतरा उत्पन्न होने से संजीदा एनजीटी ने तत्काल इस पर रोक लगाने का निर्देश दिया। इसके बाद कई डाइंग प्लांट बंद हो गए, लेकिन प्रदूषण पर अब भी पूरी तरह रोक नहीं सकी है।
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3. खस्ताहाल सड़कों पर मौत का डेरा:
जिले की कई सड़कें बेहद जर्जर हो गईं हैं। इसके चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रहीं हैं और लोगों की जान भी जा रही है। वाराणसी-इलाहाबाद राजमार्ग भी कई स्थानों पर गड्ढे में तब्दील हो गया है। ज्ञानपुर-दुर्गागंज रोड वर्षों से जानलेवा बना है। इसका निर्माण प्रस्ताव शासन में लटका है। निर्माणाधीन जौनपुर-भदोही रोड को कई जगह तोड़कर छोड़ दिए जाने से लगभग हर रोज दुर्घटनाएं हो रहीं हैं।
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4. युवाओं को बेरोजगारी का दर्द:
सरकारों के तमाम प्रयास बेरोजगारी की समस्या का समाधान नहीं कर पाए। लगभग 16 लाख की आबादी वाले जिले में हजारों युवा बेरोजगार हैं। लगभग हर महीने जिला सेवायोजन विभाग और विभिन्न शिक्षण संस्थानों की ओर से रोजगार मेले का आयोजन किया जाता है, लेकिन बेरोजगारी का आंकड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा। युवा पीढ़ा कुंठित हो रही है। हर वैकेंसी में लाखों की संख्या में आवेदन हो रहे हैं। करीब 35 हजार से अधिक बेरोजगार जिले में पंजीकृत है।
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5. पेट्रोल-डीजल ने रुलाया :
महंगाई की मार से त्रस्त आम आदमी को पेट्रोल और डीजल की हर रोज बढ़ती कीमतें खून के आंसू रुला रहीं हैं। पेट्रोल 85 रुपये के निकट पहुंच गया है, जबकि डीजल भी 75 रुपये प्रति लीटर से ऊपर चल रहा है। इसका असर चहुंतरफा पड़ रहा है। रोजमर्रा की जरूरतें भी महंगी हो गई हैं। सब्जी से लेकर राशन तक इस कदर महंगा हो गया है कि लोगों को घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।
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6. गंदगी ने बिगाड़ी सूरत:
सरकार से प्रोत्साहित होकर हर तरफ जहां स्वच्छता मिशन के नारे बुलंद किए जा रहे हैं, वहीं धरातल पर हकीकत इसके उलट है। सड़कों से लेकर गली-मोहल्ले तक गंदगी का ढेर तैयारियों की कलई खोलता दिख रहा है। इससे शहर की सूरत बिगड़ गई है। यही वजह है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में भदोही जिला काफी पिछड़ गया है। गांवों को ओडीएफ करने की प्रशासनिक हकीकत बेहद कड़वी है।
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7. अस्पताल : दवा न डॉक्टर
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से जूझ रहे जिले में कदम-कदम पर समस्याओं का बोलबाला है। सरकारी अस्पतालों में न तो पर्याप्त संख्या में चिकित्सक हैं ना ही दवाएं हैं। दवाएं हैं भी वे मरीजों को नहीं मिल पातीं। गरीब मरीजों को भी बाहर से दवा लेनी पड़ती है। सख्ती के बाद भी सरकारी चिकित्सक बाहर की दवाएं लिखने से बाज नहीं आते। थोड़े से भी गंभीर केस में सरकारी अस्पताल रेफर कर देते हैं।
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8. घटता जा रहा कारोबार:
कालीन उद्योग के लिए विख्यात भदोही में मूल उद्योग को झटका लगा है। दोयम दर्जे के कच्चे माल और दूसरे प्रदेशों से यहीं के कालीन को निर्यात करने से विदेशी बायरों में भदोही के कालीन का क्रेज घटा है। इसका असर निर्यात पर पड़ा है। यही वजह है कि देश के कुल कालीन निर्यात में 60 फीसदी से अधिक की भूमिका निभाने वाले भदोही जिले के निर्यात में करोड़ों की कमी आ गई है।
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9. आमजन को रुला रही बिजली :
उद्योग के लिहाज से महत्वपूर्ण जिले में बिजली की आपूर्ति कभी सुधर नहीं पाई। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिला मुख्यालय को 24 घंटे, नगरों को 20 और गांवों को 18 घंटे की बिजली आपूर्ति का निर्देश धरा का धरा रह गया। कभी भी बिजली निर्धारित शेड्यूल के तहत नहीं मिल पाई। जर्जर तार-पोल, ओवरलोड और शटडाउन-ब्रेकडाउन की बाधा हमेशा ही बिजली आपूर्ति को पंगु बनाए रखती है।
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10. भ्रष्टाचार ने रोकी तरक्की:
भ्रष्टाचार का दानव हर कदम पर जनमानस को डराए हुए है। सरकारी कार्यालयों से लेकर पुलिस विभाग तक का दामन भ्रष्टाचार से दागदार हो चुका है। जिले के तीन पुलिसकर्मियों पर पैसे के लिए पशु तस्करी में संलिप्त होने की बात उजागर होने के बाद उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। ज्यादातर सरकारी विभागों में चढ़ावा चढ़ाने के बाद ही काम होता है। इस तरह की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं।