ज्ञानपुर। जिले के 30 फीसदी निजी अस्पताल बिना एग्जिट डोर के चल रहे हैं। अगर कभी अस्पताल में आग लगने की घटना होती है तो मुख्य द्वार को छोड़ मरीजों, तीमारदारों को निकासी के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
इससे आपात स्थिति में गंभीर संकट हो सकता है। सीएमओ ने इस तरह के अस्पतालों को चिह्नित करने के लिए दो सदस्यीय टीम बनाई है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर अगले सत्र में ऐसा अस्पतालों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
जिले में निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक, अस्पताल सहित कुल 140 का पंजीकृत है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी अस्पताल को लाइसेंस जारी करने से पहले 34 बिंदुओं पर समीक्षा होती है। इसके बाद लाइसेंस जारी किया जाता है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 34 बिंदुओं में अब तक एक्जिट डोर का जिक्र नहीं है। ऐसे में इसके बिना भी अस्पताल को लाइसेंस जारी किया जा सकता है।
ज्ञानपुर, भदोही, गोपीगंज, सुरियावां में तमाम अस्पताल बिना एग्जिट डोर के चल रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में आग की घटनाएं होने के बाद एक्जिट डोर की उपयोगिता समझी गई।
वहीं, कई अस्पताल इतनी संकरी जगहों पर हैं कि वहां अग्निशमन के वाहन भी नहीं पहुंच सकते। इस तरह की परेशानियों को देखते हुए अब विभागीय स्तर से अस्पतालों में एक्जिट डोर को भी अनिवार्य करने की तैयारी किया जा रहा है।