लघु सिंचाई विभाग की तरफ से जिले में दो करोड़ 60 लाख की लागत से मिनी नलकूप और पंपिगसेट लगाने के लिए बोरिंग की जाएगी। इसमें 17 मध्यम और 25 गहरी बोरिंग की जाएगी। इसके लिए किसानों को 50 फीसदी तक अनुदान मिलेगा। पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर किसानों को लाभ मिलेगा।
जिले में 60 से 70 हजार हेक्टेयर रकबे में रबी और खरीफ की खेती होती है। नहर और राजकीय नलकूप ही सिंचाई के प्रमुख साधन हैं। कई क्षेत्रों में पानी की सुविधा न होने से किसान सिंचाई के लिए परेशान होते हैं। फसल की सिंचाई को लेकर किसानों को अनुदान देकर पंपिंगसेट और नलकूप की स्थापना करने के लिए लघु सिंचाई विभाग की ओर से अनुदानित बोरिंग योजना चलाई जा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 17 मध्यम और 25 गहरी बोरिंग का प्रस्ताव विभाग ने शासन को भेजा है। पहले आओ-पहले पाओ के तहत किसानों का चयन होना है। विभागीय आंकड़ो पर गौर करें तो मध्यम बोरिंग पर प्रति बोरिंग पांच लाख 14 हजार खर्च आएगा। इसमें दो लाख 57 हजार किसानों को अनुदान मिलेगा। इसी तरह प्रति गहरी बोरिंग पर आने वाले छह लाख 94 हजार में तीन लाख 47 हजार का अनुदान होगा। इससे किसान बोरिंग कराकर मिनी नलकूप व पंपिंगसेट की स्थापना कर सकेंगे।
डार्कजोन में होने से पांच साल तक नहीं हो सकी बोरिंग
जल दोहन अधिक होने से जिले के छह ब्लॉकों को साल 2015 से लेकर 2020 तक डार्कजोन में रखा गया था। इससे मध्यम व गहरी बोरिंग पर रोक लग गई थी। 2021 में सभी ब्लॉक इससे बाहर आए, लेकिन कोविड के कारण योजना परवान नहीं चढ़ सकी। 2022 में 70 बोरिंग का जहां प्रस्ताव हुआ था वहीं 2023 में 42 का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है