प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के 1784 और 547 से अधिक निराश्रित पेंशन के आवेदन संबंधित कार्यालयों में लंबित पड़े हुए हैं। सत्यापन नहीं होने से 2300 लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिल सका है। डीएम आर्यका अखौरी ने आवेदन पत्रों का निस्तारण नहीं होने पर नाराजगी जताई है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को उन्होंने पत्र लिखकर एक सप्ताह में लंबित आवेदन पत्रों के निस्तारण के लिए चेतावनी भी दी है।
बेटी के जन्म पर पात्र लाभ देने के लिए कन्या सुमंगला योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत किसी भी परिवार में बेटी पैदा होने पर उसके जन्म से लेकर पढ़ाई तक सरकार की ओर से निर्धारित धनराशि छह किस्तों में लाभार्थी को दी जाती है। वर्ष 2019-20 में प्रोबेशन विभाग की ओर से सात हजार बालिकाओं को योजना से लाभान्वित किया गया था। इसी तरह से वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 में अब तक 11 हजार 490 बेटियों को योजना का लाभ मिल चुका है। विधानसभा चुनाव के चलते करीब दो महीने तक विभागों में कार्य की गति धीमी रही। बीते 10 मार्च के बाद काम में तेजी आई, लेकिन अब भी अलग-अलग विभागों में कन्या सुमंगला योजना के तहत आए आवेदन लंबित है। प्रोबेशन विभाग के आंकड़ों के अनुसार सभी छह बीडीओ, छह खंड शिक्षा अधिकारियों, तीनों तहसीलों, बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में 1784 आवेदन लंबित हैं। इसमें ज्यादातर आवेदन पत्रों के सत्यापन ब्लॉकों में नहीं हो पाए हैं। इसी तरह निराश्रित महिला पेंशन के 547 आवेदन पत्रों का निस्तारण नहीं हो सका है। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर एक सप्ताह में लंबित आवेदन पत्रों का निस्तारण करने का निर्देश दिया है। उधर, नए वित्तीय वर्ष में जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में कई आवेदन स्वीकृत हुए हैं। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के 16, सामान्य वर्ग के 48, कन्या सुमंगला योजना के 274, महिला पेंशन के 900 आवेदन स्वीकृत हुए हैं। इन सभी योजनाओं में अप्रैल से जून तक की धनराशि लाभार्थियों के खातों में भेजी जानी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी शत्रुघ्न कन्नौजिया ने कहा कि स्वीकृत आवेदन सबमिट किए जा चुके हैं। लाभार्थियों के खाते में शासन स्तर से ही धनराशि भेजी जाएगी।