ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार आईडी) बनाने में विद्यालयों की लापरवाही कम नहीं हो रही है। करीब एक साल बाद भी विद्यालयों ने शत-प्रतिशत अपार आईडी नहीं बनाई। आलम यह है कि तीन लाख 93 हजार बच्चों में डेढ़ लाख की आईडी अब तक नहीं बन सकी है। इसको लेकर डीआईओएस ने माध्यमिक के 225 स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अपार आईडी को वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी के नाम से भी जाना जाता है। यह प्री प्राइमरी से हायर एजुकेशन में अध्ययनरत विद्यार्थियों की बनाई जानी है। यह केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। जिले में 885 परिषदीय, 735 मान्यता प्राप्त और 193 समेत कुल 1940 स्कूल, मदरसे संचालित हैं। इसमें तीन लाख 93 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। स्कूल महानिदेशक से लेकर अन्य अधिकारी लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। दिसंबर 2024 से आईडी बनाने का काम शुरू हुआ। करीब एक साल बाद भी आईडी बनाने की प्रगति सुधर नहीं रही है। लापरवाही के चलते एक लाख 60 हजार विद्यार्थियों आईडी नहीं तैयार हो सकी है। डीआईओएस अंशुमान ने कहा कि अभी तक शत प्रतिशत आईडी एक भी विद्यालय नहीं बना सके हैं। 225 राजकीय, वित्तपोषित, मान्यता प्राप्त, सीबीएसई से जुड़े विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया है। 31 दिसंबर तक हर हाल में इसे पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवम पांडेय ने अपार आईडी बनाने में उदासीनता बरतने वाले विद्यालयों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि परिषदीय विद्यालयों की प्रगति ठीक है। 100 मान्यता प्राप्त विद्यालयों में 50 प्रतिशत से कम आईडी बनाई गई है। कहा कि खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर प्रगति बेहतर करने का निर्देश दिया गया है। अपार आईडी 12 अंकीय डिजिटल पहचान है। जो आधार कार्ड की तरह काम करती है। यह उनके सभी शैक्षिक रिकार्ड जैसे अंक पत्र, डिग्री, क्रेडिट और पुरस्कारों को एक जगह सुरक्षित रखती है। जिससे उन्हें अलग-अलग संस्थानों में जमा करने की ज़रूरत न पड़े। पढ़ाई के दौरान क्रेडिट ट्रांसफर आसान हो सके।
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