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श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह सुन भाव विभोर हुए भक्त

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चौरी। क्षेत्र के भकोड़ा में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के पांचवेें दिन शुक्रवार को कथावाचक शिव शंकराचार्य वैरागी महराज ने श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया। इसमें श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की झांकी निकाली गई, जिसे देखकर भक्त झूमने लगे। वरमाला के बाद भक्तों आशीर्वाद लिया। कथावाचक शिवशंकराचार्य वैरागी जी महाराज ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था। लेकिन रुक्मणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल गोपाल को पति के रूप में वरण करेंगी। क्योंकि शिशुपाल असत्य मार्गी और द्वारिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण सत्य मार्गी हैं। इसलिए उन्होंने असत्य को नहीं सत्य का फैसला किया था। भगवान द्वारिकाधीश ने रुक्मणी के सत्य संकल्प को पूरा करने के लिए उन्हें पत्नी के रूप में वरण कर प्रधान पटरानी का स्थान दिया।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि इस प्रसंग को श्रद्धा के साथ श्रवण करने से कन्याओं को सुमंगल वर की प्राप्ति होती है। कथा आयोजन संजीव दूबे की ओर से किया जा रहा है। इस मौके पर अतुल कांत पांडेय, सुनरल, गुड्डू दुबे, राजमणि दुबे, विजय विश्वकर्मा, बलिराम पटेल, सोनू दुबे, विनीत दुबे, कमलाशंकर पांडेय, विनोद मिश्रा, चंद्रेश तिवारी, अमन पांडेय आदि मौजद रहे।
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