ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्त महाविद्यालय में रविवार को साहित्यिक संस्था हिंदी संस्कृति साहित्य संगम की ओर से राष्ट्रवाद की अग्नि परीक्षा विषयक काव्य और विचार दर्शन का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्र को जन-जन से जोड़ने पर जोर दिया गया। साहित्यकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं भी प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि डॉ. गिरिजाशंकर तिवारी ने कहा कि रचनाएं ऐसी होनी चाहिए, जिसको सुनकर मन में देशभक्ति की भावना जागे। राष्ट्रवाद की अग्नि परीक्षा संस्था के उपाध्यक्ष महेंद्र नाथ दूबे ने कहा कि भारत का अध्यात्म ही दूषित राजनीति और भ्रष्ट नेताओं के दुष्प्रयासों को स्वत: विफल कर देगा। विशिष्ठ मुख्य अतिथि डॉ. कामिनी वर्मा, डॉ. अमित गोयल ने अपनी रचना से लोगों को जागरूक किया। युवा कवि इंदू चंद्र पांडेय ने अपनी रचना भारत के आदर्श टूटते नजर आ रहे हैं और योगेश शुक्ल ने भारत की तस्वीर बदल दो प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। वरिष्ठ कवि विनीत कुमार श्रीवास्तव ने अपनी रचना से राजनीतिक भ्रष्टाचार और छद्म राष्ट्रवाद पर प्रहार किया। रचनाकार मुन्नु लाल मिश्र अकेला ने जोड़ो संसद राष्ट्रवाद से सुनाकर अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय दिया। कवि जगदीश चंद्र श्रीवास्तव ने कौन प्रलय की छाती पर चढ़कर हुंकार भरेगा कविता सुनाकर वीर रस से श्रोताओं में साहस भरने का प्रयास किया। इस दौरान केएस उपाध्याय, आकाश धर दूबे, विमलेश पांडेय, श्रीकांत मिश्र, रामसागरप तिवारी, शशि कुमार पांडेय, संतोष श्रीवास्तव, लक्ष्मण यादव, राधेश्याम दूबे, विजयशंकर सिंह यादव मौजूद रहे।