भदोही। वर्ष 2003-04 में आम बजट में भदोही को विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) चिह्नित करने के बाद यह हवा- हवाई होकर रह गया है। घोषणा के लगभग डेढ़ दशक बाद अब तो उद्यमी इसके बारे में चर्चा तक नहीं करते। लोगों का मानना है कि योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए जो इच्छाशक्ति चाहिए, वह किसी ने नहीं दिखाई दी। नतीजा यह हुआ कि सेज के लिए जमीन अधिगृहीत करने और किसानों को मुआवजा बांटने के बाद भी अब तक मामला केवल साइन बोर्ड तक ही पहुंच सका है।
आल इंडिया कारपेट मनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के उपाध्यक्ष हाजी अब्दुल हादी अंसारी ने कहा कि योजना में कालीन उद्यमियों के लिए काफी सौगातों की घोषणा की गई थी। सेज के दायरे में ही कंपनियां कालीनों का उत्पादन करने के साथ ही उसी सीमी के भीतर कालीनों की तैयारी भी होती। इसके अलावा एक्सपोर्ट-इंपोर्ट के लिए माल क्लीयरिंग के लिए न केवल सिंगल विंडो व्यवस्था इसमें होती, बल्कि सेज के दायरे में कार्य करने वाली कंपनियों को दस वर्षों तक आयकर में छूट भी दिए जाने का प्रावधान था। एकमा के अध्यक्ष ओएन मिश्र ने कहा कि सेज प्रत्येक कालीन उद्यमी के लिए बेहद लाभप्रद योजना थी। लेकिन, यह परवान नहीं चढ़ सकी। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालीन उद्योग के लिए काफी कुछ किया है और अभी बहुत कुछ करना बाकी है। कालीन उद्योग उनसे सेज के रूप में एक और सौगात चाहती है। यदि उन्होंने चाहा तो निश्चित रूप से सेज की स्थापना हो पाएगी और उद्योग विकास करेगा।