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वामन अवतार की कथा सुन हुए भावविभोर

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सीतामढ़ी। कोनिया क्षेत्र के कलातुलसी गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कथावाचक आचार्य हरि कृष्ण महाराज ने वामन अवतार की कथा सुनाई। इसमें अहंकार पर सदविचारों की विजय पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने कहा कि त्रिलोक में शासन करने वाले महाराजा बलि को अपनी संपत्ति और ऐश्वर्य पर अहंकार हो गया था। राजा बलि के अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान ने वामन रूप धारण किया और भिक्षा मांगने राजा बलि के पास पहुंच गए। अभिमान से चूर राजा ने वामन भगवान को इच्छानुसार दान देने का वचन दिया, तो भगवान ने तीन पग भूमि मांगी। भगवान वामन ने एक पग में धरती, दूसरे में स्वर्ग नाप लिया जब तीसरा पग रखने को जगह नही बचा तो राजा बलि ने भगवान से तीसरा पग अपने सिर पर रखने को कहा। भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम मानव जीवन शैली एवं आचरण के अवतार हैं। कहा कि इस कुत्सित संसार में जीने की कला रामावतार से प्राप्त होती है जबकि कृष्णावतार भगवान नारायण का साक्षात अवतार है, जहां बिना अस्त्र के भी संपूर्ण ब्रह्मांड का शुद्धीकरण और वैचारिक पवित्रता दिखती है। इस मौके पर अवध नारायण पांडेय, अजय नारायण, उदय नारायण, राजा पांडेय, बिपिन, रवींद्र, बच्चा पांडेय, अतुल आदि रहे।
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