ज्ञानपुर। मौसम के बदलते मिजाज के बीच आलू और दलहनी फसलें खतरे में पड़ गईं हैं। दो-तीन दिनों से पड़ रहे घने कोहरे के चलते पाला मारने की आशंका में किसानों की चिंता बढ़ गई है। दलहनी और सरसों की फसलें तो पाला के प्रकोप से तो अभी बचीं हैं, लेकिन आलू में अगैती झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ गया है। इससे इस बार आलू की पैदावार घटने की आशंका बढ़ गई है। इस बार आलू उत्पादन का लक्ष्य 16 हजार एमटी रखा गया है।
बढ़ती ठंड जहां गेहूं और अन्य फसलों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, वहीं घने कोहरे के चलते आलू, सरसों, अरहर और मटर की फसलों को पाला मारने की आशंका भी बढ़ गई है। इससे किसान सशंकित हो चले हैं। वैसे तो अब तक फसलों पर पाला का असर नहीं दिख रहा है, लेकिन आलू की फसल में जगह-जगह अगैती झुलसा रोग का प्रकोप देखा जाने लगा है। आलू की पत्तियां मुरझा कर सिकुड़ सी गईं हैं, जिन्हें फसल की सेहत के लिए नुकसानदेय माना जा रहा है। किसान हरिशंकर यादव ने कहा कि आलू की पत्तियां सिकुड़ रहीं हैं, जिससे निपटने के लिए दवा का छिड़काव किया जा रहा है। इसे जानकार अगैती झुलसा रोग बता रहे हैं। इस बार जिले में 800 हेक्टेयर रकबे में आलू की खेती की गई है, जिससे उत्पादन का लक्ष्य 16 हजार एमटी का रखा गया है। इस मौसम के मद्देनजर किसान फसलों को पाला से बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। इसी तरह दलहनी फसलों को भी पाला से नुकसान की आशंका जताई जा रही है। कृषि विभाग के मुताबिक इस बार जिले में 7000 हेक्टेयर रकबे में अरहर, मटर और चना आदि दलहनी फसलों की खेती की गई है। सब्जी की खेती के लिए भी ज्यादा कोहरा नुकसानदेय हो सकता है। जिला कृषि अधिकारी अशोक प्रजापति ने कहा कि अब तक फसलों में मौसम की वजह से रोग लगने की सूचना कहीं से नहीं मिली है।