ज्ञानपुर (भदोही)।
धनतेरस और दिवाली के उपलक्ष्य में खरीदारी के लिहाज से जिले का सराफा बाजार दमक उठा है। जिले के सराफा बाजार को इस धनतेरस पांच करोड़ से अधिक के कारोबार की उम्मीद है। आने वाले समय में खरीदारी में पैन आदि के तकनीकी पेच को देखते हुए ग्राहक धनतेरस पर ही शादी-ब्याह के लिए भी आभूषणों की खरीदारी कर लेना चाहते हैं। दो लाख तक की खरीदारी पर पैन से छूट मिलने के कारण भी सराफा बाजार को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। धनतेरस मंगलवार को है लेकिन इसके मद्देनजर गहनों की बुकिंग हफ्तेभर पहले से भी ज्यादा समय से हो गई है। स्थानीय स्तर पर ग्रामीण बाजार होने के कारण ज्यादातर ग्राहक आभूषणों की खरीदारी शादी-ब्याह के लिहाज से ही करते हैं। इसे देखते हुए सराफा कारोबारियों ने भी ग्राहकों की मंशा को कैश कराने का पूरा प्रबंध कर लिया है। सोने-चांदी के सिक्कों के अलावा बरतन और इलेक्ट्रॉनिक्स आयटमों के अग्रिम ऑर्डर को देखते हुए बाजार में कई विकल्पों को उतार दिया गया है। व्यापारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं के सामने विकल्पों की कमी नहीं होगी। दूसरी ओर तमाम ग्राहकों ने अपने हिसाब से खरीदारी शुरू भी कर दी है। हालांकि मुख्य खरीदारी धनतेरस पर ही होगी।
जीएसटी और नोटबंदी ने लगाया खरीदारी के उत्साह पर ब्रेक
जानकारों का मानना है कि नोटबंदी और जीएसटी का असर इस बार धनतेरस पर आभूषणों की खरीदारी पर भी पड़ सकता है। लोगों की जेब में इफरात पैसे नहीं हैं। वैसे तो दो लाख तक पैन से छूट के कारण खरीदारी में लाभ मिलेगा लेकिन एकमुश्त कैश की कमी खरीदारी में रोड़ा बनेगी। अपेक्षाकृत छोटे बाजार में दो लाख रुपये कैश की उपलब्धता किसी चुनौती से कम नहीं। शायद यही वजह है कि खरीदारों के अब तक के उत्साह को देखते हुए व्यापारी भी असमंजस में हैं। वे अब तक स्पष्ट नहीं हो सके हैं कि पिछले कानूनी झंझावातों का बाजार पर क्या असर पड़ेगा। फिर भी पूरा बाजार बेहतर खरीदारी को लेकर आशान्वित है।
सावधान! बाजार में उतरी नकली सिक्कों की खेप
जिले के बाजार में नकली सिक्कों की खेप उतर गई है। धनतेरस की आपाधापी और गहमागहमी में तमाम मुनाफाखोर ग्राहकों को तगड़ा चूना लगाने की फिराक में हैं। कई सराफा कारोबारियों का मानना है कि इन सिक्कों में चांदी की मात्रा 40 से 45 फीसदी ही रहती है, बाकी मिलावट है। ऐसे में सिक्कों की खरीदारी बहुत सोच-समझकर की जानी चाहिए नहीं तो धोखा खाना पड़ सकता है। विक्टोरिया के नाम पर भी नकली सिक्के आ गए हैं।
खरीदारी में चलेगी ‘चीप एंड बेस्ट’ की थ्योरी
इस बार बाजार में ग्राहकों का मूड अब तक कारोबारी भी भांप नहीं सके हैं, लेकिन माना जा रहा है कि हमेशा की तरह ‘चीप एंड बेस्ट’ की थ्योरी अपनाई जाएगी। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि ज्यादातर ग्राहकों के पास कैश नहीं है। सराफा कारोबारी अशोक कुमार कहते हैं कि ग्रामीण बाजार होने के कारण यह मूल रूप से खेती-किसानी पर निर्भर रहता है। ऐसे में स्थानीय ग्राहकों से खरीदारी में बहुत ज्यादा रईशी की उम्मीद नहीं की जा सकती, लेकिन इतना जरूर है कि यहां का उपभोक्ता कम पैसे में सादा और खूबसूरत आभूषण पसंद करता है और उसे चुनने की भी कला उसके पास है। इस लिहाज से बाजार तैयार है।