जिले की 20 लाख की आबादी पर केवल चार फिजिशियन की तैनाती है। विशेषज्ञों की अनुपस्थिति में फिजिशियन ही मरीजों को देखते हैं, लेकिन फिजिशियन की कमी होने के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीज फिजिशयन के न मिलने पर परेशान होते हैं। निजी अस्पताल का रुख करते हैं।
जिले में महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल, सौ शय्या अस्पताल और एमबीएस अस्पताल के साथ ही 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। कुल 29 अस्पताल हैं। इन अस्पतालों में एमबीबीएस, फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ मिलाकर कुल 150 डॉक्टरों की तैनाती है। जिले में अब भी कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलाजिस्ट, ईएनटी, स्कीन, कैंसर विशेषज्ञ आदि के डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे इन समस्याओं से ग्रसित मरीज अस्पताल पहुंचने के बाद फिजिशियन से ही दवा लेते हैं। जिलेभर में कुल 11 फिजिशियन की जरूरत है, लेकिन इसके सापेक्ष केवल चार फिजिशियन ही तैनात है। इसमें महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डीघ पर एक-एक फिजिशियन की तैनाती है। वहीं महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय में दो फिजिशियन है। फिजिशयन ही शुगर, बीपी, हार्ट और सांस के मरीजों को भी देखते हैं।
इनसेट:
वाराणसी, प्रयागराज मरीज होते हैं रेफर:
कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलाजिस्ट, ईएनटी, स्कीन विशेषज्ञ, कैंसर विशेषज्ञ आदि के विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में इन बीमारी से संबंधित गंभीर मरीजों को वाराणसी, प्रयागराज रेफर किया जाता है। यहां न जाने वाले मरीज निजी अस्पताल का रुख करते हैं। 200 से 500 रुपये फीस देकर डॉक्टर को दिखाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के सीएचसी और पीएचसी पर तो स्थिति और खराब है। वहां एमबीबीएस डॉक्टर ही फिजिशियन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मरीज चाहे जैसे ही आए, उपचार करना है।
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29 स्वास्थ्य केंद्रों पर 5500 की ओपीडी:
जिले के महाराजा चतेसिंह जिला चिकित्सालय ज्ञानपुर, महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय और सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल सहित छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोपीगंज, भानीपुर, डीघ, भदोही, औराई, सुरियावां और 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना औसतन 5000 से 5500 की ओपीडी होती है। इन केंद्रों पर करीब 150 डॉक्टरों की तैनाती है।
वर्जन:
रिक्त पदों की सूचना शासन को दी गई है। नई तैनाती नहीं हुई। जिले में चार फिजिशियन है, जो नियमित ओपीडी करते हैं। जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी में भी जाते हैं। -
डॉ. एसके चक, सीएमओ, भदोही।