सीतामढ़ी। गंगा सफाई के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है, लेकिन श्मशान घाटों की ओर किसी का ध्यान नहीं है। शवदाह स्थलों पर व्याप्त गंदगी, अधजले शव, गंदे कपड़े, अधजली लकड़ियां और अन्य गंदगी के अंबार से शवदाह स्थलों का बुरा हाल है। सारी गंदगी गंगा में फेंक दी जाती है, जिसके चलते गंगा निर्मलीकरण की बात बेमानी साबित हो रही है।
जिले के सीतामढ़ी श्मशान घाट पर कई जनपदों के लोग शवों का अंतिम संस्कार करने आते हैं। लेकिन इस महत्वपूर्ण शवदाह स्थल की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। लाखों रुपये की लागत से बना शवदाह गृह देखरेख न होने के चलते खंडहर में तब्दील होने लगा है। स्थिति है कि शवदाह गृह के आसपास की मिट्टी बारिश के पानी से कट कर बह गई है, जिससे गंगा किनारे तक का रास्ता भी बाधित हो गया है। मिट्टी कटान से शवदाह गृह के अस्तित्व पर भी संकट मंडराने लगा है। खास बात यह है कि श्मशान घाट को जाने वाली सड़क काफी जर्जर और नाले के रूप में तब्दील हो चुकी है। घाट से शवदाह स्थल गंगा किनारे का रास्ता इतना खराब ओर जर्जर है कि लोग जान जोखिम में डालकर किसी तरह किनारे तक पहुंचते हैं। नारेपार के आसाराम शुक्ला, ब्रह्मदेव पांडेय, सत्यनारायण यादव ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मरम्मत की मांग की।