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नाम वापसी तक जोश, बाद में खो बेठे होश- प्लानिंग

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ज्ञानपुर। लाव-लश्कर संग नामांकन करने वाले निर्दल और छोटे दलों के प्रत्याशियों का जोश चंद दिनों में ही ठंडा हो गया। भदोही सीट पर ताल ठोंक रहे भाजपा, कांग्रेस और गठबंधन प्रत्याशी को छोड़ दिया जाए तो एकाध निर्दल और छोटे दल के प्रत्याशी ही चुनाव प्रचार में लगे हैं, जबकि अन्य तो चुपचाप घर बैठ गए हैं। कई प्रत्याशियों का तो आज तक दफ्तर भी नहीं खुल सका।
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छठे चरण में भदोही संसदीय सीट के लिए 16 अप्रैल से नामांकन शुरू हुआ। गठबंधन, भाजपा, कांग्रेस समेत 32 प्रत्याशियों ने नामांकन किया। कोई खुली जीप तो कोई समर्थकों की भीड़ के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचा। नामांकन पत्रों की जांच में 20 का पर्चे खारिज हो गए। नाम वापसी के बाद 12 प्रत्याशी चुनावी मैदान में बचे। इनमें बसपा-सपा गठबंधन प्रत्याशी रंगनाथ मिश्र, भाजपा के रमेशचंद्र बिंद, कांग्रेस के रमाकांत यादव, एनसीपी के डॉ. अखिलेश द्विवेदी, पीपुल्स पार्टी आफ इंडिया के डॉ. राजेश कुमार वर्मा, निर्दलीय कुलदीप, पूर्वांचल क्रांति दल के रामसखा त्रिपाठी, हिंदुस्तान निर्माण दल के विनोद, निर्दल सुशील, निर्दल संतलाल, जनहित किसान पार्टी के सैय्यद मोहम्मद आरिफ और भारत माता सपूत पार्टी के सतीश बेलदार रहे। नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद प्रमुख दलों के प्रत्याशियों ने जहां प्रचार में पूरी ताकत लगा दी है, वहीं निर्दल और छोटे दल के प्रत्याशी दो से चार दिन जनसंपर्क करने के बाद घर बैठ गए। कुछ दलों ने तो अब तक अपने कार्यालय भी नहीं खोले। पूर्वांचल क्रांति दल के प्रत्याशी रामसखा त्रिपाठी कुछ समर्थकों संग रथ से भ्रमण कर रहे हैं तो एनसीपी के डॉ. अखिलेश द्विवेदी प्रचार वाहन से जनता के बीच पहुंच रहे हैं। एकाध निर्दल प्रत्याशी को छोड़ दें तो सभी शांति की मुद्रा में आ गए हैं।
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