ज्ञानपुर। मोदी सरकार के अंतिम बजट में किसानों पर भले ही मेहरबानी दिखाने का दावा किया गया हो, लेकिन जिले के किसान इसे नाकाफी मानते हैं। उनका कहना है कि इसमें संदेह नहीं कि बजट में किसानों पर करम किया गया है, लेकिन केवल इतने भर से भला होने वाला नहीं है। उन्हें सीधा फायदा देने के लिए बजट में प्रावधान बनाया जाना चाहिए था।
वेदपुर के किसान हरिशंकर यादव ने कहा कि किसानों के हित में यह बजट रहा। इसमें दो हेक्टेयर तक रकबे के स्वामी किसानों को प्रति वर्ष छह हजार रुपये तक की मदद खेतीबाड़ी की लागत में मददगार साबित होगी, लेकिन किसान बीमा और क्षतिपूर्ति मिलने में कदम-कदम पर भ्रष्टाचार में डूबी व्यवस्था का क्या। क्या गारंटी है कि इस बजट में बनाए गए प्रावधान के मुताबिक किसानों को लाभान्वित करने में सरकारी मशीनरी पूरी पारदर्शिता बरतेगी। चकसहाब के मुन्ना खां ने कहा कि यह चुनावी बजट है। अभोली के किसान जगदंबा शुक्ला ने कहा कि बजट खेतीबारी के लिहाज से बेहतर है। चुनावी साल का बजट होने के नाते भले ही इसे चुनावी कह दिया जाए, लेकिन सरकार ने किसानों समेत हर वर्ग को खुश करने का प्रयास किया है। लखनो के अशोक दुबे ने कहा कि खेतीबाड़ी के मोर्चे पर बहुत कुछ करने की जरूरत है। सरकारी नलकूप खराब चल रहे हैं। नालियां वर्षों से टूटी पड़ी हैं, लेकिन उनके बारे में सोचने और योजना बनाने की दिशा में नहीं सोचा जा रहा है। ऐसे में किसानों की हालत कैसे सुधरेगी। सरकार को जमीनी स्तर पर प्रयास करने चाहिए। बजट ऐसा होना चाहिए कि सभी वर्ग को एक साथ फायदा हो।