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बज्मे गुलशने अदब की शेरी नशिस्त

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भदोही। बज्मे गुलशने अदब के जानिब से बीती रात कजियाना में शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया जिसमे कवियों और शायरों ने उर्दू अदब और साहित्य को जिवंत बनाए रखने की आम जन से अपील की। नशिस्त में शायरों ने अपने कलाम और रचनाओं के माध्यम से सामयीन को आधी रात तक बांधे रखा। मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के इरफान आलम ने कहा कि साहित्य को बचाए रखना जरूरी है। कहा कि साहित्य ही ऐसा मंच है जहां सच जीवित है।
उस्ताद शायर जमील खां मजनू भदोहवीं ने वर्तमान राजनीति पर व्यंग करती हुई रचनाएं सुनाकर लोगों की तालियां बटोरीं। कहा कि जुबान की मिठास से मिलने वाले सम्मान से सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सुनाया- नफरत की धुंध मिलती है उंचे मकान से - इज्जत बुलंद होती है शीरीं कलाम से। बुजुर्ग शायर आसिम अशहरी ने अपने अशआर से मां बाप का मर्तबा बयान करते हुए कहा- मेरे बेटे मुझे कमजोर समझ कर न सता - तेरे बच्चे भी बहुत जल्द सयाने होंगे।
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शायर आरिफ जाफरी ने कहा- उल्फत है जिसको आपसे अहले किताब से - इनकार न कर पाएंगे उस दिन शराब से। युवा शायर नौशाद शमसी ने कहा- बात अच्छी न लगती थी जिसको मेरी - आज सुनने वो मेरा कलाम आ गया। शायर शाबान करीमी ने कहा- देखते हैं हम जिधर-जिधर आप आ रहे हैं बस नजर। कैसर जौनपूरी, शमशाद करीमी, कर्मराज किसलय, वाहिद अंसारी ने अपने-अपने कलाम प्रस्तुत किए। मो. नसीम, वामिक सिद्दीकी, अतीक, एजाज अंसारी आदि लोग मौजूद थे।
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