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सावधान:पूर्वोतर के स्टेशन हुए बेपानी,संयंत्रों में उतर रहा करंट

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लालानगर। यात्री गण कृपया ध्यान दें, यदि आप पूर्वोत्तर रेलवे के स्टेशनों से यात्रा कर रहे हैं तो पीने के लिए पानी की व्यवस्था स्वयं करनी होगी... धन्यवाद। जी हां! ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन से यात्रा हो या फिर जंगीगंज, अहिमनपुर, माधोसिंह, कटका आदि से, आपको हर स्टेशन पर पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। नए लगे समरसेबुल पंप चार माह बाद भी चालू नहीं हो सके हैं तो हैंडपंप अपनी ही दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। रही बात वाटर कूलरों की तो प्रचंड गर्मी में भी ये विभागीय उपेक्षा के कारण सेवा नहीं दे पा रहे हैं। इनमें करेंट उतरने से मुश्किलें बढ़ गईं हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे के मंडुआडीह-इलाहाबाद सिटी खंड पर स्थित ज्ञानपुर रोड, माधोसिंह स्टेशन राजस्व के रूप में लाखों का टर्नओवर विभाग को कराते हैं। स्टेशन से ट्रेन पकड़ने और ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को उस समय जटिल समस्या का सामना करना पड़ जाता है, जब ट्रेनें स्टेशन पर रुकती हैं। इस बीच शुरू होने वाली पानी के लिए भागमभाग कई बार घटनाओं को भी जन्म दे देती है। ज्ञानपुर रोड स्टेशन पर लगे 6 हैंडपंपों में से दो की हालत सुधार दी गई, लेकिन चार हैंडपंप अब भी मरम्मत की बाट देख रहे हैं। यही स्थिति विंध्यधाम परिक्षेत्र को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण स्टेशन माधोसिंह का भी है। यहां दो दशक पहले बनीं टंकियों के जीर्ण-शीर्ण हो जाने और हैंडपंपों को न बनवाए जाने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। बता दें कि खंड पर हुए आमान परिवर्तन के बाद तीन जोड़ी पैसेंजर के साथ-साथ दर्जनभर से अधिक मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन बड़े पैमाने पर कराया जा रहा है। मंडलीय अधिकारियों की उदासीनता कभी भी यात्रियों को मिलने वालीं सुविधाओं पर खरा नहीं उतर पाईं। स्टेशन कर्मचारी भी मंडल स्तरीय अधिकारियों के रहमोकरम पर ही निर्भर रहते हैं। अन्य मौसमों की अपेक्षा गर्मी के समय यह समस्या और गंभीर बनी रहने से पीने के पानी के लिए यात्रियों को दर-दर की ठोकरें ही खाने को विवश करता रहता है। इस संबंध में मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वाराणसी मंडल अशोक कुमार का कहना है कि मातहतों को आदेश पारित कर पेयजल की समस्याओं को दूर कराने के लिए कहा जा चुका है। यदि लापरवाही बरती गई है तो जांच कराई जाएगी।
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लोटा-बाल्टी वालों की कमाई बढ़ी
लालानगर। माह अप्रैल के समापन के समय ही पारा 44 के पार हो जाने से एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों के स्टेशन पर रुकते ही लोटा-बाल्टी वालों की कमाई बढ़ा दी है। वह भी ऐसे समय का मानो इंतजार करते रहते हैं। दो रुपये लोटा, पांच रुपए बॉटल तो 10 रुपये में भरी बाल्टी का पानी यात्री क्रय कर प्यास बुझाते हैं। विकट स्थिति उस समय खड़ी हो जाती है जब एक साथ दो-दो ट्रेनों की क्रासिंग के समय पानी बेच रहे किशोर और युवक दौड़भाग कर चोटिल हो जाते हैं। स्टेशन पर सुरक्षा की दृष्टि से रेलवे पुलिस भी सबकुछ देखकर आंख मूंदे रहती है।
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लालानगर। लगभग चार वर्ष पहले पेयजल संसाधनों आदि के मेंटनेस का जिम्मा संभालने वाले आईडब्ल्यू से प्रभार छीनते ही स्टेशनों पर समस्या खड़ी होने लगी। प्रतिमाह 10 हजार रुपये सभी छोटे-बड़े स्टेशनों पर आनलाइन मिलने वाले धन पर अब लोगों की नजर गड़ गई है। स्टेशन अधीक्षक, स्टेशन मास्टर उक्त धन से मामूली तकनीकी खराबियों को दूर कराने में हाथ क्यों पीछे खींचते रहते हैं, इसको लेकर सवाल खड़ा हो गया है।
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