ज्ञानपुर। जिले में कुपोषण की तस्वीर भयावह हो चली है। तमाम कोशिशों के बाद भी कुपोषित बच्चों की तादाद कम नहीं हो रही है। इस वर्ष की पहली तिमाही की सर्वे रिपोर्ट में कुपोषण की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। तीन माह में ही कुपोषित बच्चों की संख्या में चार हजार बढ़ गई है। अब यह 29 हजार तक पहुंच गई है।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण और कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं को धरातल पर उतारने और कारगर बनाने की जिम्मेदारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग और स्वास्थ्य विभाग के कंधों पर है। गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं और शिशुओं की जांच, टीकाकरण और पोषण के नाम पर करोड़ों रुपये सरकार इन विभागों को भेजती है। धनराशि की बंदरबांट और प्रशासन की लापरवाही के चलते कुपोषण पर नियंत्रण की कवायद बेकार साबित हो रही है।
मार्च 2019 में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि हुई है। इससे सरकार की ओर से चलाई जा रहीं योजनाओं पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। बच्चों की न तो नियमित जांच हो रही और न उन्हें पोषाहार मिल पा रहा। यही वजह है कि तीन महीने में ही कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ गई है। दिसंबर 2018 में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या 25 हजार 325 थी, जबकि अब यह संख्या 29 हजार 800 पहुंच गई है। इसमें लाल श्रेणी यानी अति कुपोषित की संख्या नौ हजार 249 और पीली श्रेणी यानी कुपोषित की संख्या 20 हजार 689 है।
पोषण पुनर्वास केंद्र नहीं पहुंच पाते बच्चे
ज्ञानपुर। कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र खोला गया है, लेकिन कुपोषित बच्चों को पहुंचाने में आंगनबाड़ी केंद्र उदासीन बने हैं। एक साल में आए 88 बच्चों में 50 से अधिक केवल औराई ब्लॉक से रहे। यहां के सीडीपीओ की पहल पर अधिक बच्चे आए, जबकि अन्य ब्लॉकों से गिने-चुने बच्चों को ही भेजा गया।
कुपोषित बच्चों को सामान्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाता है। बच्चों और धात्रियों को पोषाहार, दवाओं के माध्यम से आयरन आदि कमी होने से रोका जाता है। कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आ रही है।
उर्मिला देवी, डीपीओ भदोही