गोपीगंज। औराई विकास खंड के डेरवां गांव में जलजमाव और कीचड़ गांव के विकास की तस्वीर बयां कर रही है। नाली न होने से बारिश में लोगों को समस्याओं से जूझना पड़ता है। कल्याणकारी योजनाओं के बाद भी कुपोषित बच्चों की संख्या में भी कमी नहीं हो पा रही है। एक आंगनबाड़ी केंद्र पर अधिक कार्यकर्ताओं की तैनाती पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाया। दलित और बिंद बस्ती के विकास में उपेक्षा का आरोप लगाया।
एक साल पूर्व जिला विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी ने डेरवां गांव को गोद लिया था, लेकिन अब भी गांव को विकास का इंतजार है। गांव में नाली, सड़कों का अभाव है। तीन हजार की आबादी वाले गांव में 1800 मतदाता हैं। जनेश्वर मिश्र योजना के तहत गांव में कुछ मार्गों को आरसीसी बनाया गया, पर कई मार्ग अब भी खड़ंजा नहीं हो सके। इससे बारिश में कच्चे मार्ग पर चलना मुसीबत भरा हो जाता है। गांव के गजराज बिंद ने आरोप लगाया कि बिंद बस्ती की विकास में उपेक्षा की गई। इंटरलॉकिंग सड़क के साथ ही पानी निकासी के लिए नाली नहीं बनी है। इससे घरों से निकलने वाला पानी जगह-जगह एकत्रित होकर दुर्गंध पैदा करता है। बारिश में स्थिति और भी खराब हो जाती है। बस्ती में हैंडपंप न होने से लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। दलित बस्ती की कुसुम देवी ने कहा कि बस्ती में जल निकासी और इंटरलाकिंग न होने से कीचड़ से होकर लोगों को गुजरना पड़ता है। कहा तीन आंगनबाड़ी केंद्र पर 122 बच्चों में 25 से अधिक कुपोषित हैं। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र का एकमात्र भवन बना है।
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तीन साल में काफी हुआ विकास
गोपीगंज। डेरवां के ग्राम प्रधान सुरेश चंद यादव ने कहा कि तीन साल में 410 शौचालय, 400 मीटर खड़ंजा, आरसीसी मार्ग का निर्माण कराया गया। प्रकाश के लिए 80 सोलर लाइट लगाई गई हैं। प्राथमिक विद्यालय में शौचालय, बाउंड्रीवाल संग 11 पात्रों को प्रधानमंत्री आवास मुहैया कराया गया।
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पोषण मिशन के तहत डेरवां गांव को गोद लिया गया है। समय-समय पर कुपोषण की मानीटरिंग की जाती है। 13वें और 14वें वित्त से होने वाले कार्य पंचायत राज विभाग देखता है। मानक के अनुसार ही कार्य कराया जाता है।
जयकेश त्रिपाठी, डीडीओ भदोही