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कांशीराम आवास के 1100 मकानों पर अवैध कब्जा

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ज्ञानपुर। कंसापुर में शहरी गरीबों के लिए बने मान्यवर कांशीराम आवास के 1100 से अधिक आवासों पर कब्जा है। शुक्रवार को अधिशासी अधिकारी ज्ञानपुर की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मामला संज्ञान में आने पर ईओ ने सात कर्मचारियों की टीम सत्यापन के लिए लगा दी है। सोमवार से टीम एक-एक आवास का सत्यापन करेगी। आवास परिसर में व्याप्त गंदगी दूर करने के लिए भी कर्मचारी को लगाया गया। अमर उजाला ने इस समस्या को 31 जनवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
बसपा सरकार में शहरी गरीबों को आवास मुहैया कराने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने अपने राजनीतिक गुरु स्व. कांशीराम की स्मृति में मान्यवर कांशीराम शहरी निर्बल आवास योजना लागू की थी। उस दौरान ज्ञानपुर नगर के कंसापुर क्षेत्र में करीब 29 करोड़ की लागत से 1500 आवास बनाए गए। जनपद के घोसिया, खमरिया, भदोही, सुरियावां नगर पंचायत से शहरी गरीबों का चयन कर आवास आवंटन किया गया। 24 से अधिक आवास घूमंतू किस्म के वनवासियों को आवंटित किया गया। कुछ दिन आवासों में रहने के बाद वनवासी अपने आवासों को छोड़कर चले गए। यहीं नहीं खाली पड़े आवासों को कुछ लोगों ने किराए पर दे दिया। आवास के ब्लाक नंबर 33, 54, 45, 87 के कुछ कमरों को किराया पर दिया गया है। सबसे खास बात यह है कि जिन लोगों को किराए पर आवास दिए गए हैं, वह गैर जनपद के रहने वाले हैं। इनकी गतिविधियों के बारे में कालोनी के लोगों को संदेह था, जिसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों को दी गई।
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शुक्रवार को अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत राजेंद्र दूबे ने कांशीराम आवास का निरीक्षण किया और वहां रहने वाले आवंटियों की जांच की। इस दौरान जो तथ्य सामने आए वह काफी चौंकाने वाले रहे। 1500 में करीब 70 फीसदी यानि 1100 आवास ऐसे मिले, जिनमें आवंटी नहीं रहते। उन आवासों में बाहरी व्यक्ति किराए पर लेकर रहते मिले। ईओ ने बताया कि नगर पंचायत के आपरेटर घनश्याम की निगरानी में सात सदस्यी टीम गठित की गई है। सोमवार से टीम एक-एक आवास के आवंटी के अभिलेखों का सत्यापन करेगी। उन्होंने बताया कि स्वच्छता के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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