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वाणिज्य कर विभाग कार्यालय से लाइव रिपोर्ट

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जीएसटी
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भदोही। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) युग में वाणिज्य कर विभाग कार्यालय तो पहले जैसा ही होगा लेकिन कालीन उद्यमी और व्यापारियों के लिए बहुत से कायदे कानून बदल चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि आज से कालीन निर्माण और बिक्री पर टैक्स प्रथा लागू हो गई है जो पहले शून्य था। इसके अलावा भी कई बड़े बदलाव हुए हैं जिनका पालन करना प्रत्येक व्यापारी अथवा उद्यमी के लिए अनिवार्य होगा। यह कहना है वाणिज्य कर कार्यालय के असिस्टेंट कमिश्नर, और जीएसटी हेल्प डेस्ट प्रभारी, संजय कुमार सिंह का।
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औराई रोड स्थित वाणिज्य कर विभाग कार्यालय के बाहर आज वाहनों की भरमार रही। दिन भर बाइक और चार पहिया वाहन से लोग आते जाते रहे। सभी को जीएसटी से संबंधित भ्रांतियां दूर करने की चिंता थी। कुछ लोग जीएसटी में पंजीकरण के लिए तो कुछ लोग अनिवार्यता संबंधी जानकारी लेने के लिए पहुंच रहे थे। दिन भर में ऐसे 6 दर्जन व्यापारी कार्यालय पहुंचे जहां विशेष रूप से बनाए गए हेल्पडेस्क के माध्यम से जिज्ञासाएं दूर की गई।
इस बाबत असिस्टेंट कमिश्नर ने बताया कि जब तक चालान, कैश, टैक्स, सेल इनवायस का नया प्रारूप जारी नहीं हो जाता व्यापारी पुराना प्रारूप इस्तेमाल कर सकेंगे। जिनके पास नया आईडी और पासवर्ड जारी नहीं हुआ है वे अपने पुराने टिन नंबर का इस्तेमाल करेंगे लेकिन उस पर जीएसटीएन हेतु आवेदित शब्द लिखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कालीन को धुलाई, कटाई, बुनाई अथवा अन्य काम के लिए कहीं माल भेजने के लिए चालान का इस्तेमाल हर हाल में करना होगा। जिन लोगों ने अब तक जीएसटीएन प्राप्त नहीं किया है वे आनलाइन आवेदन कर प्राप्त कर सकते हैं।
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बताया कि 20 लाख से ऊपर के टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए जीएसटी में पंजीकरण अनिवार्य होगा। उससे कम टर्नओवर वाले भी स्वेच्छा से पंजीकरण करा सकते हैं। एक सवाल के जवाब ने उन्होंने साफ किया कि केवल जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी ही इनपुट टैक्स क्रेडिट के हकदार होंगे।
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