गोपीगंज। गर्मी में एसी टिकट के लिए मारामारी बढ़ गई है, लेकिन ज्ञानपुर रोड स्टेशन पर दलालों की कारस्तानी से तत्काल टिकट में खूब खेल हो रहा है। पहले ही टिकट निकाल लिए जाने के कारण घंटों पहले पहुंच कर लाइन में लगने वाले यात्रियों को मायूसी मिल रही है। सामान्य दिनों में कम से कम पहले और दूसरे नंबर के यात्री को कन्फर्म टिकट मिल जाता था, लेकिन पिछले एक सप्ताह से पहले नंबर का टिकट भी वेटिंग निकल रहा है। इससे लोग तंग आ गए हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे के ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन पर आरक्षण टिकटों के वितरण की व्यवस्था भले ही समय निर्धारित कर दिया गया हो, लेकिन यात्रियों में दलालों का वर्चस्व अभी भी भारी ही पड़ता दिखाई दे रहा है। गर्मी के कारण एसी टिकट की बढ़ी मांग को पूरा कर पाने में कामर्शियल विभाग पसीना छोड़ दे रहा है। तो वहीं खिड़की पर दलालों का तिलिस्म तोड़ पाने में रेलवे पुलिस का पूरी तरह से मूकदर्शक बने रहना यात्रियों को मायूस करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। शादी-विवाह और बच्चों की छुट्टी में परदेश से घर लौटे लोगों की भारी भीड़ वापस अपने ठिकानों पर पहुंचने के लिए विवश कर रही है। इस बाबत लोग टिकट के लिए देर रात और भोर से उक्त आरक्षण खिड़की पर लंबी लाइनों में खड़े होकर जब तक नंबर आने का इंतजार करते हैं तब तक सुबह के 10 बजे तक बंटने वाला एसी तत्काल टिकट का आरक्षण या तो ओवरफुल हो जाते हैं या फिर वेटिंग की लंबी लिस्ट। खिड़की खुलने से पूर्व बैकडोर से सांठ-गांठ रखने वाले दलालों को ही दोनों टिकटों का आवंटन होना विभागीय खेल यात्रियों को रास नहीं आ पा रहा है। गत पांच महीने से तरह-तरह के विवादों में रह कर सुर्खियों में छाने वाला आरक्षण काउंटर दलालों के चंगुल में फंस कर इस तरह उलझा है कि ऊपरी आमदनी का मोह न तो खिड़की पर तैनात रहने वालों पर कोई खास असर छोड़ पा रहा है और न ही सुरक्षा की दृष्टि से। स्टेशन पर तैनात संबंधित जिम्मेदार लोग सब कुछ देखते हुए भी कुछ कर पाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते जो यात्रियों के आक्रोश का कारण बन बैठता है। इस बाबत स्टेशन अधीक्षक अशोक कुमार वर्मा का कहना था कि गर्मी की अधिकता के कारण यात्री स्लीपर बोगी में यात्रा करने की अपेक्षा एसी को अधिक महत्व दे रहे हैं। समसामयिक मांग को देखते हुए दूरगामी नगरों-महानगरों को जोड़ने वालीं ट्रेनों में ऐसी बोगियां देखते ही देखते फुल हो जा रही है। जबकि स्लीपर क्लास का टिकट किसी भी समय प्राप्त किया जा सकता है। तत्काल टिकट पर कहा कि रेल प्रशासन की उपेक्षात्मक रवैये के कारण दलालों का रैकेट साइट को हैक करते ही वह भी वेटिंग लिस्ट को बढ़ा दे रहा है, जिससे लाइन में खड़े यात्रियों को बिना टिकट ही वापस लौटना मजबूरी बन रही है।