ज्ञानपुर। क्रय केंद्र प्रभारियों की उदासीनता और बाजार में अधिक कीमत मिलने से जिले में गेहूं खरीद की रफ्तार ठिठक गई है। खरीद के लिए अब चंद दिन शेष हैं। ऐसे में लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल दिख रहा है। अब तक 78 फीसदी तक खरीद हुई है, जिसे 15 जून तक बमुश्किल 80 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
रबी और खरीफ सीजन में सरकार गेहूं और धान किसानों से खरीदती है। एक अप्रैल से जिले में गेहूं की खरीद के लिए कुल 26 क्रय केंद्र खोले गए। अप्रैल में खरीद कच्छप गति से चली, लेकिन मई के एक पखवारे में खरीद में तेजी आई, हालांकि जून के पहले सप्ताह तक खरीद फिर ठिठक गई। 10 जून तक 30 हजार के मुकाबले 23 हजार 805 एमटी गेहूं की खरीद हो चुुकी है। गोपीगंज और औराई विपणन केंद्रों को छोड़ दिया जाए तो अन्य केंद्रों पर खरीद की स्थिति ठीक नहीं है। अब तक हुई खरीद पर नजर डाली जाए तो विपणन विभाग के छह केंद्रों को मिले लक्ष्य के मुकाबले 55 जबकि पीसीएफ 65.33 फीसद गेहूं की खरीद की जा चुकी है। इसी क्रम में विकिप्रो कंपनी लिमिटेड, नेफेड और भारतीय खाद्य निगम के केंद्र शत-प्रतिशत खरीद कर सबसे आगे हैं। बचे हुए चार दिनों में लक्ष्य को पूरा करना विभाग के लिए चुनौती है। अब तक 78 फीसदी के करीब खरीद हुई है, जो 15 जून तक 80 फीसदी तक पहुंच सकती है। गेहूं खरीद कम होने के पीछे कुछ क्रय केंद्र प्रभारियों की उदासीनता भी है। गेहूं की साफ-सफाई के लिए आने वाली रकम में भी कटौती की बात सामने आई। बाजार में सरकारी रेट से अधिक कीमत मिलने के साथ ही व्यापारी किसानों के घर जाकर गेहूं खरीद लेते, जिससे वे क्रय केंद्र पर न आकर वहीं बेच देते। वहीं दूसरी ओर जंगीगंज, सुरियावां समेत कई क्रय केंद्रों पर जगह के अभाव में गेहूं को बाहर ही रखा गया है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो अब तक 4440 किसानों से खरीद के बाद खाते में 44 करोड़ 50 लाख उनके खाते में भेजा जा चुका है।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी श्याम कुमार मिश्र ने बताया कि केंद्रों पर पहुंचने वाले किसानों को गेहूं खरीद में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। कुछ क्रय केंद्रों पर जगह के अभाव में गेहूं बाहर रखा गया है। उसे गोदामों में भेजवाया जा रहा है।