सीतामढ़ी। डीघ ब्लॉक के गांवों में हैंडपंपों के रिबोर में बड़े पैमाने पर सरकारी धन का गोलमाल किया गया है। खुले बाजार में 15 हजार में होने वाले रिबोर के लिए 35 हजार रुपये तक खर्च दिखाया गया। इसके बाद भी तमाम हैंडपंपों का रिबोर ठीक से नहीं हो पाया और ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। इसमें विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत भी रही है।
हैंडपंपों का रिबोर ग्राम प्रधानों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी साबित हो रही है। स्थिति यह है कि जितनी बड़ी ग्रामसभा, उतना ज्यादा गोलमाल। पाइप के साथ रिबोर का खुले बाजार में 15 हजार से 20 हजार रुपये का खर्च दुकानदार और ठेकेदार लेते हैं, जबकि ग्राम सभाओं में उससे घटिया मानक के हैंडपंपों के रिबोर का खर्च ग्राम प्रधान सरकारी खाते से 30 से 38 हजार रुपये निकालते हैं। बताते हैं कि सरकारी धन का बंदरबांट ऊपर तक की जाती है। विकास खंड के कई ऐसे गांव हैं, जहां के ग्राम प्रधान सब काम छोड़ कर बड़ी संख्या में हैंडपंपों का रिबोर करवा कर अपनी जेबें भरने में लगे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि जितने हैंडपंपों का रिबोर कराया गया है, उनकी पड़ताल की जाए तो 25 फीसदी रिबोर में सबमर्सिबल पंप लगा दिया गया है, जबकि नियमानुसार इनमें हैंडपंप होना चाहिए। बता दें कि डीघ क्षेत्र में हैंडपंपों की 120 से 160 फीट गहराई वाली बोरिंग की जाती है। इसमें पाइप, जाली, ग्रेविल आदि डाला जाता है। इस बारे में बीडीओ डीघ सुरेंद्र कुमार मौर्या ने कहा कि बिल और लिस्ट देखने के बाद ही बता सकता हूं कि ब्लॉक की ग्राम सभाओं में कितने हैंडपंपों का रिबोर कराया गया और प्रति हैंडपंप कितने रुपये खारिज किए गए हैं। कहा कि हैंडपंपों के रिबोर में सबमर्सिबल पंप बिल्कुल नहीं लगने चाहिए।