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कंबल कारखाने की खटर-पटर बंद, गहराया संकट

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गोपीगंज। उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से स्थापित गोपीगंज पड़ाव स्थित कंबल कारखाने की खटर-पटर बंद हो गई है। कच्चे माल की आवक न होने से कारखाने पर एक बार फिर बंदी का संकट गहरा गया है। प्रतिदिन 20 से 25 कंबल उत्पादन की क्षमता वाले कारखाने के कर्मचारी एक साल से कच्चे माल का इंतजार कर रहे हैं।
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भदोही स्थित इंदिरा उलेन मिल, औराई चीनी मिल के साथ ही गोपीगंज का कंबल कारखाना भी कई साल से बंद पड़ा था। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद 25 अगस्त 2017 को खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के मंत्री सत्यदेव पचौरी ने कंबल कारखाने का जीर्णोद्धार कराकर दोबारा संचालन कराया था। उस दौरान उक्त कंबल कारखाने को चालू कराने में करीब 24 लाख खर्च आया था। शुभारंभ के समय कारखाना करीब 20 से 25 दिन तो ठीक ठाक चला और 312 कंबल का उत्पादन भी किया गया। उसके बाद कच्चे माल की उपलब्धता न होने से करीब एक साल से अधिक समय से उत्पादन ठप हो गया है। प्रतिदिन 20 से 25 कंबल उत्पादन की क्षमता वाले कारखाने में सात लूम है जिसमें पांच चालू हालत में है। शासन ने पहले ऊन से क़ंबल तैयार करने का विचार किया। वहां से ऊन भी भेजा गया लेकिन वह खराब होने पर वापस कर दिया गया। उसके बाद काती से कंबल तैयार करने की पहल शुरू हुई, लेकिन अब तक काती उपलब्ध नहीं हो सका। कारखाने में दो महिला पांच पुरुष बुनकर हैं, जबकि प्रबंधक को लेकर चार कर्मचारी हैं। कंबल का उत्पादन न होने से हर महीने सरकार को एक से दो लाख के राजस्व की चपत लग रही है। कंबल कारखाने के प्रबंधक मो. सलीम ने बताया कि काती की कमी से उत्पादन ठप है। जल्द ही काती की उपलब्धता होने पर कंबल का उत्पादन शुरू हो जाएगा।
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