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लगातार दूसरे वर्ष लक्ष्य से पिछड़ गया कालीन निर्यात

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भदोही। भारतीय कालीन उद्योग लगातार दूसरे वर्ष अपने निर्यात लक्ष्य से पीछे रह गया है। वर्ष 2017-18 में जहां कालीन उद्योग लक्ष्य से 7.10 प्रतिशत पीछे रह गया था वहीं गत 31 मार्च को बीते वित्तीय वर्ष में यह लक्ष्य से लगभग एक प्रतिशत पीछे रह गया। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018-19 में 10 हजार 500 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष 10432.7 करोड़ रुपये का निर्यात ही हो सका। कहा जा रहा है कि नोटबंदी से तो उद्योग उबर चुका है लेकिन जीएसटी अभी भी इस पर भारी पड़ रही है।
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परिषद के चेयरमैन महावीर प्रताप शर्मा ने बताया कि पहले नोटबंदी से समस्या हुई। उद्यमी किसी तरह उससे पार पाए तो जीएसटी भारी समस्या बन कर सामने आया। बताया वर्ष 2016-17 में 9993.93 करोड़ रुपये का कालीन निर्यात हुआ था। उसी वित्तीय वर्ष के दिसंबर में नोटबंदी की घोषणा हुई जिसका असर 2017-18 के कालीन निर्यात पर साफ दिखा और निर्यात 7.10 प्रतिशत घट कर 9205.84 करोड़ तक ही पहुंच सका। बताया कि भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 10500 करोड़ का लक्ष्य रखा था। हमारे सामने 7.10 प्रतिशत घाटे को पूरा करने के अलावा लक्ष्य को भी पूरा करने की चुनौती थी।
कहा कि लक्ष्य से तो हम मामूली रूप से पीछे रह गए लेकिन 2017-18 के मुकाबले 13.25 प्रतिशत अधिक निर्यात किया जो जीएसटी युग में उत्साहजनक कहा जाएगा। चेयरमैन ने कहा कि उद्योग के सामने अभी भी कई चुनौतियां हैं। जब से जीएसटी लागू हुआ है तब से उद्योग को मिलने वाले ड्राबैक को लगभग खत्म कर दिया गया है। इससे उद्यमियों का भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि आज भी जीएसटी में कालीन उद्यमियों के करोड़ों रुपये रिफंड के नाम पर फंसे हुए हैं। इसके अलावा जीएसटी से जुड़ी अन्य जटिलताएं अलग हैं।
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