ज्ञानपुर। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में बिखरे मेडिकल कचरे से इंफेक्शन के खतरे को देखते हुए बना जैव अपशिष्ट भंडारण कक्ष शोपीस बनकर रह गया है। पांच माह पूर्व बने कक्ष में अब भी ताला लगा हुआ है। जिससे नगर पंचायत की गाड़ी से हर रोज कचरा उठाया जा रहा है।
चिकित्सालयों में हर रोज निकलने वाले मेडिकल कचरे से गंदगी फैलने के साथ इंफेक्शन बढ़ने खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए जैव अपशिष्ट भंडारण कक्ष बनाया गया है। जो लगभग पांच महीने पूर्व से बनकर तैयार है, लेकिन निर्माण के बाद से अब तक उसका ताला नहीं खुल सका। जिससे इंफेक्शन का खतरा पूर्व की भांति बना हुआ है। वहीं अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल कचरे को चिकित्सालय की इमरजेंसी वार्ड के बाहर इकट्ठा किया जाता है। बायो मेडिकल वेस्ट उठाने के लिए एक कंपनी को अनुबंध किया गया है। जिसका महीने में हजारों का बजट जारी होता है। कई दिन का मेडिकल कचड़ा हो जाने पर उसे नगर पंचायत की गाड़ी से हटवाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कई दिनों तक परिसर में मेडिकल कचरे के पड़े होने से बीमारियों का खतरा बना हुआ है। हालांकि चिकित्सालय के प्रभारी सीएमएस डॉ. अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि जिस कंपनी को उठाने का जिम्मा दिया गया था, वह नहीं आ रही है। जल्द इसके प्रयोग और निस्तारण की स्थायी व्यवस्था कराई जाएगी।
किस रंग के कक्ष में क्या होना चहिए
लाल रंग के कक्ष में ट्यूबिन, ग्लब्स, आईवी सेट, ब्लड बैग, यूरिन बैग, सिरिंेंज जैसी इंफेक्टेड सामग्री डाली जाती है। पीले रंग के कक्ष में मानव उत्तक (टिश्यू), रक्त रंजित रुई, पट्टियां, प्लेसेंटा (बच्चे की नाल), मान के कटे हुए भाग आदि डाले जाते हैं। वहीं नीले रंग के कक्ष में ब्लेड्स, दवाओं का कचरा, कांच की टूटी बोतलें, प्लास्टिक की टूटी-फूटी बोतलें आदि सामान डिब्बे में डाली जाती हैं।