ज्ञानपुर। लखनो गांव में 12 जनवरी की सुबह 19 बच्चों के झुलसने के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद खुली और ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई। जांच कमेटी के गठन से लेकर अमान्य विद्यालयों पर सख्ती बरती गई। प्रकरण की जांच के लिए एडीएम और एएसपी को जहां जांच सौंपी गई है, वहीं स्कूलों की जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया। आरोपी चालक की गिरफ्तारी भले हो चुकी है, लेकिन अब भी प्रबंधक और प्रधानाचार्य पुलिस की पकड़ से दूर हैं। सोमवार को अमान्य विद्यालयों के खिलाफ ताबड़तोड़ हुई कार्रवाई से स्कूल प्रबंधकों में खलबली मच गई है।
उप संभागीय परिवहन विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से ध्यान न दिए जाने से अवैध स्कूलों का संचालन और नियम विरुद्ध वाहन धड़ल्ले से चल रहे थे। दो साल पूर्व कैयरमऊ हादसे में आठ बच्चों की मौत के बाद चंद दिन तक अफसर सजग रहे, लेकिन लखनो में 19 बच्चों के झुलसने के बाद शासन गंभीर हुआ तो प्रशासन की नींद खुली। डीएम ने पहले ही दिन एडीएम राम सिंह वर्मा और एएसपी डॉ. संजय कुमार के नेतृत्व में जांच टीम गठित की। रविवार को स्कूलों की जांच के लिए सीडीओ हरिशंकर सिंह के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया। वहीं दूसरी ओर बीएसए और एआरटीओ की तहरीर पर चालक, प्रबंधक, प्रधानाचार्य और गाड़ी मालिक पर कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। घटना के अगले दिन रविवार को चालक मनोज यादव को क्राइम ब्रांच और पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, लेकिन अब भी प्रबंधक, गाड़ी मालिक और प्रधानाचार्य गिरफ्त में नहीं आ सके। कार्रवाई की मांग को लेकर राजनीतिक दलों और संगठनों ने धरना-प्रदर्शन भी किया था। सोमवार शाम को मुख्यमंत्री ने पीड़ित बच्चों के परिवार वालों को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा रूपी मरहम भी दिया। इस दौरान जिले भर में प्रशासनिक अफसरों और शिक्षा विभाग की देखरेेख में 54 अमान्य विद्यालयों को बंद कराया गया। प्रशासनिक स्तर से हुई कार्रवाई के बाद आम जन को लगने लगा कि अधिकारी घटना के बाद संजीदा हो गए हैं।