ज्ञानपुर। कालीन नगरी में तेजी से बढ़ते बाल अपराध के बीच बालश्रम विरोधी मुहिम की धार कुंद पड़ गई है। पढ़ने-लिखने और खेलने की उम्र में बच्चे हाड़तोड़ मेहनत करने के साथ ही कूड़े-करकट के बीच बचपन गंवाते जिले के गली-चौराहों पर आसानी से देखे जा सकते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और अधिकारियों का दिल इससे नहीं पसीजता। इसकी बानगी विभागीय कार्रवाई में भी देखने को मिल जाती है। श्रम विभाग इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक बाल मजदूरी में 14 वर्ष या उससे कम उम्र के एक भी बच्चे को मुक्त नहीं करा पाया है। जून-जुलाई में चलाए गए पखवाड़े में केवल पांच बाल मजदूरों को छुड़ाया गया है, वह भी सभी 16 या 17 वर्ष उम्र के थे।
मजबूरी में हो या जरूरत, बाल मजदूरी किसी भी सूरत में विकसित समाज की निशानी नहीं है। लेकिन भदोही जिले में समस्या कारोबार जगत में गहराती जा रही है। कालीन कारखानों से लेकर होटल-ढाबों और सामान्य दुकानों पर बड़ी संख्या में छोटे बच्चे मेहनत मजदूरी करते आसानी से मिल जाएंगे। डेढ़ से दो वर्ष पहले कुछ बच्चों को कालीन कारखानों से मुक्त भी कराया गया था, लेकिन उसके बाद से इस समस्या को हाशिए पर डाल दिया गया है। सहायक श्रमायुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक 20 जून से लेकर पांच जुलाई तक चलाए गए अभियान के दौरान घोसिया और औराई में चलाए गए अभियान के दौरान कपड़े की दुकान और गिफ्ट कॉर्नर आदि पर काम कर रहे प्रह्लाद, नागेश, पंकज, राकेश और इंद्रेश नाम के पांच बच्चों को मुक्त कराया गया था, जिनकी उम्र 16 या 17 वर्ष थी। इससे भी कम उम्र (पांच से 14 साल) के तमाम बच्चे प्रतिदिन हाड़तोड़ मेहनत करते दिख जाते हैं। ज्ञानपुर नगर के रोडवेज, पावर हाउस, पटेल नगर, जीआईसी मैदान आदि इलाकों में बड़ी संख्या में बच्चे प्लास्टिक बीनते दिख जाते हैं। श्रम प्रवर्तन अधिकारी राम निवास ने कहा कि विभाग बालश्रम पर अंकुश लगाने के लिए गाहे-बगाहे कार्रवाई करता रहता है। इन दिनों विभागीय अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन के कारण अभियान नहीं चल पाया है। लेकिन, जल्द ही अभियान चलाकर बालश्रम कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्टेशन पर मिले दो बच्चों का पता नहीं
ज्ञानपुर। कालीन कारखाने से भागकर भदोही रेलवे स्टेशन पर जीआरपी को मिले छह बाल बंधुआ मजदूरों में से दो का सही पता कोई नहीं बता पा रहा है। भदोही जीआरपी वाराणसी कैंट थाने को देने की बात कह रही है तो कैंट जीआरपी के कंट्रोल रूम बच्चों की सुपुर्दगी की सटीक जानकारी नहीं दे पाया। थाने से बताया गया कि हो सकता है कि दो बच्चों को उनके गार्जियन को सौंप दिया गया हो। दूसरी ओर सीडब्ल्यूसी भदोही ने विंध्याचल के डीआईजी और अन्य उच्चाधिकारियों को पत्राचार शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि गत एक अक्टूबर को भदोही स्टेशन से मिले छह बच्चों में से बाल कल्याण के लिए काम कर रही संस्था ‘साथी’ को केवल चार बच्चे ही सुपुर्द किए गप्तए। दो बच्चे कहां गए, यह तस्वीर साफ नहीं हो पाई।