करीब 10 दिनों तक बाढ़ की विभिषिका से जूझ चुके गांवो की स्थिति अब भले ही सामान्य हो गई हैं, लेकिन बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी। कड़ी मेहनत कर खेतों में बोई गई करीब 147 हेक्टेअर फसल बाढ़ के पानी में डूबकर नष्ट हो गई। प्रशासनिक अफसर नुकसान का आकलन कर रहे हैं लेकिन माना जा रहा है कि 10 से 12 करोड़ का नुकसान हुआ है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से पिछले दिनों गंगा से सटे करीब 100 से अधिक गांव के लोगों को काफी परेशानी से जूझना पड़ा था। बाढ़ से डीघ के कोनिया, धनतुलसी, बदरी, बेरासपुर, कलातुलसी, रामपुर घाट समेत ज्यादातर गावों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया था, जिससे उन गांव में बोई की दलहन, तिलहन, बाजरा समेत कई फसलें तीन से चार दिनों तक पानी में ही डूबी रह गई थीं। करीब दस दिनों बाद पानी घटा तो गावों की स्थिति सामान्य हुई लेकिन बाढ़ के पानी से सैकड़ो किसानों की उम्मीदे भी बह गई। प्रशासनिक आंकड़ो के अनुसार ज्ञानपुर और औराई तहसील के 74 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए। इन गावों में 147 हेक्टेअर क्षेत्रफल में बोई गई फसल बाढ़ के चलते नष्ट हो गई। जिन फसलों को अधिक नुकसान पहुंचा है उसमें दलहनी, तिलहनी और बाजरा हैं। प्रभारी उप निदेशक कृषि आरएन सिंह ने बताया कि दलहनी और तिलहनी फसलों को बाढ़ से अधिक प्रभावित हुईं। प्रशासन और कृषि विभाग नुकसान का आकलन करने की बात कही हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि 10 करोड़ से अधिक की चपत बाढ़ से लगी।