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अजोराधाम में धार्मिक अनुष्ठान से माहौल भक्तिमय

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जंगीगंज। काशी-प्रयाग के मध्य स्थित इब्राहिमपुर पुरवा के गंगा तट पर आयोजित महा शक्तिपीठ अजोरा महोत्सव के दूसरे दिन व्याख्यान, प्रवचन और भजनों से पूरा क्षेत्र भक्तिय हो गया है। आसपास से पहुंच रहे श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन हो गए हैं।
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महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को जगतगुरु शंकराचार्य महापीठाधीश्वर पीठ के स्वामी प्रज्ञानंद सरस्वती महराज ने कहा की शिव पुराण के उमा संहिता के अध्याय 51 में बताया गया है की जो देवी के लिए मंदिर बनवाता है वह हजारपीढ़ियों का उद्धार करता है और जन्म जन्मांतर तक प्रतिष्ठा पाता है। मंदिर निर्माण करते ही उसके जन्मों के अवशिष्ट पाप छण भर में नष्ट हो जाते है। महाराज जी ने कहा की जहा जहां देवी- देवताओं को पीठासीन कर महा शक्ति पीठ की स्थापना होती है अति भौतिक छेत्र में कुल शब्द का अर्थ उत्तम वंश और ऋख़ी कुल नैतिक धार्मिक आध्यात्मिक और भौतिक शिक्षाओं का केंद्र होता है। जहां शिव मंदिर है वहां शक्ति स्वरूपा देवी का भी निवास होता है। जैसे काशी के पास विशालाक्षि देवी का निवास है उसी तरह सेमराधनाथ की भैरवी मां अंजोरा देवी का कात्यायनी अवतार हुआ। इसके पूर्व प्रख्यात भजन गायक विरेंद्र मिश्र, वशिष्ठ मिश्र और श्रीकांत दुबे ने उत्कृष्ट भजनों की प्रस्तुति देकर सराहना बटोरी। मौके पर आयोजक परमेश्वर नाथ मिश्र, रेखा मिश्र, सोमेश्वर नाथ मिश्र, राजेश्वर नाथ मिश्र, प्रज्ञा त्रिपाठी आदि रहे।
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