भदोही। मोहर्रम की दसवीं यौमे आशूरा को नगर में ताजियों का जुलूस परंपरागत तरीके से निकाल कर गोलामंडी स्थित करबला में लेजाकर ठंडे कर दिए गए। गाजे बाजे और फने सिपहगिरी का प्रदर्शन करते हजारों युवक विभिन्न मोहल्लों से होते हुए ताजिए लेकर रात लगभग 8 बजे करबला पहुंचे। जुलूस में भारी संख्या में महिलाओं की भीड़ रही। अधिकारिक रूप से भदोही और नईबाजार को मिलाकर कुल 65 ताजिए निकाले गए। बताया जा रहा है बारिश के चलते कुछ ताजिए नहीं निकाले जा सके। प्रशासन व ताजियादारों के साथ तय समय 2 बजे के स्थान पर तकिया कल्लन शाह से जुलुस 3.15 बजे रवाना हो सका।
लिप्पन तिराहे के बाद आनंद नगर गजिया स्थित श्रीराम जानकी मंदिर के बाहर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने चैन बनाकर भीड़ को नियंत्रित किया। जुलूस और ताजियों के साथ शामिल लोगों ने जगह जगह लकड़ी कला का प्रदर्शन किया। जुलूस में युवक हुसैन जिंदाबाद के नारे लगाते चल रहे थे। जुलूस मार्ग पर दोनों ओर अकीदमंदों की भारी भीड़ थी। रास्ते में श्रद्धालु ताजिया की जियारत कर रहे थे। रास्ते भर घरों के बारजे व छत महिलाओं व बच्चों से पटे थे। इस दौरान भारी संख्या में गैर मुस्लिम श्रद्धालुओं ने भी ताजियों के आगे मत्था टेका। अंतिम ताजिया के ठंडा करते करते रात 10 बज गए। आखिरी ताजिया ठंडा होते ही प्रशासन ने राहत की सांस ली। जुलूस में शामिल लोग अधिकारियों को बधाई देते देखे गए।
नईबाजार। मोहर्रम के यौमे आशूरा पर नगर में कुल छह ताजिए निकाले गए। यहां का ताजिया जुलूस भदोही नगर से कहीं अधिक संवेदनशील होने के नाते पुलिस प्रशासन वहां को लेकर खासा गंभीर और सक्रिय रहा। शाम 7.45 बजे तक वहां के सभी ताजियों को मथुरापुर स्थित कर्बला ले जाकर ठंडा कर दिया गया। जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
नूरखांपुर में आलमपुर के अखाड़े पर पत्थर फेंके
भदोही। मोहर्रम की नौंवीं तारीख को (बीती रात) आलमपुर मोहल्ले से अखाड़े के दौरान अराजक तत्वों ने खलल डालने का प्रयास किया। बताया गया है कि जब रात 11.30 बजे अखाड़ा जब नूरखांपुर पहुंचा कुछ लोगों ने अखाड़े पर ईंट पत्थर फेंके जिससे अखाड़ा में लेकर चल रहे प्रकाश व्यवस्था को नुकसान पहुंचा। कई लोगों को पत्थरों से चोटें आईं। ईंट पत्थर चलने से अखाड़े में अफरा तफरी मच गई। लोग इधर उधर भागने लगे। सूचना पर पहले डायल-100 की पुलिस मौके पर पहुंची। बताया जा रहा है कि समझाने बुझाने पर अखाड़े के लोग मान तो गए लेकिन आगे जाने से इंकार कर दिया और वहीं से वापस हो लिए। पुलिस द्वारा सुरक्षा व्यवस्था नहीं किए जाने से लोगों में रोष दिखा।
भदोही। ताजिया और गणेश पूजा साथ साथ पड़ने से पुलिस प्रशासन को शांति व्यवस्था बनाए रखने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। विवाद की छोटी छोटी सूचनाएं मिलने पर सीओ अभिषेक कुमार पांडेय और कोतवाल नवीन कुमार तिवारी पहुंच जा रहे थे। शुक्रवार को दिन में 11 बजे पुलिस को किसी ने बताया कि रामसहायपुर और और दरोपुर से ताजिए भी आने हैं और रास्ते में गणेश पूजा प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। इतना सुनकर अफसर मौके पर पहुंच गए। वहां लोगों को सौहार्द का पाठ पढाते हुए यह समझाया कि सब का पर्व सबको मनाना चाहिए और इसी में असल आनंद है। यहां लोगों को समझाया गया कि पूजा करने वाले लोग ताजियादारों को रास्ता दें और ताजियादार कृतज्ञता जताते हुए निकल जाए। यही गंगा जमुनी तहजीब है।यहां से अधिकारीगण घमहापुर मोहल्ला गए जहां ताजिया के रास्ते में पानी भर जाने से ताजिया के लिए रास्ते की वैकल्पिक व्यवस्था करनी थी। मोहल्ले में ताजियादारों से वार्ता कर तय किया गया कि वहां का ताजिया नूरखांपुर के रास्ते से जुलूस में शामिल होगा। अंत में उसी पर अमल किया गया। इस दौरान पालिकाध्यक्ष अशोक कुमार जायसवाल भी मौजूद रहे।
भदोही। पूर्व सांसद स्व. यूसुफ बेग एकता मंच द्वारा शुक्रवार को एमए समद कालेज के सामने कैंप लगाकर श्रद्धालुओं की सेवा की गई। इस मौके पर कुछ आकर्षक ताजिया बनाने वाले ताजियादारों को पुरस्कृत किया। कैंप में पूर्व विधायक जाहिद बेग ने कहा कि कर्बला की शहादत हमें त्याग और बलिदान की सीख देती है। कहा कि समाज के अच्छे लोगों को इस तरह के पर्व पर आगे आकर लोगों को सही रास्ता दिखाना चाहिए। इससे समाज का नैतिक उत्थान होगा। कैंप में अच्छे ताजियों का चयन कर पुरस्कृत किया गया। कैंप में अलीशेर खां, हसीब खां, दानिश सिद्दीकी, गुलाब राइन, राजकुमार यादव, मकबूल भदोहवी, टोनी मंसूरी, खुर्शीद खां, जावेद आसिम, अशफाक कामिल, राजू डायर आदि रहे।
भदोही। कर्बला के शहीदों की याद में निकाला जाने वाला ताजियों का जुलूस एक दर्जन मोहल्लों से होकर करबला पहुंचता है। जिसमें लगभग पांच से छह घंटे का समय लग जाता है। इसको देखते हुए जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं की सेवा के लिए निजी संस्थाओं ने जगह लोगों को पानी और शर्बत पिलाने का काम किया। तकिया कल्लन शाह से लेकर करबला तक एक दर्जन से अधिक स्थानों पर कहीं पानी पिलाया गया तो कहीं शरबत। इसके अलावा भी कई शिविरों के माध्यम से मोहर्रम का मुख्य पकवान बिरयानी और खिचड़ा के पैकेट बनाकर लोगों में बांटे गए।