कहीं राजस्व विभाग तो कहीं प्रधान की कृपा से अवैध कब्जा किया गया है।
सरकारी जमीन और तालाबों को अवैध कब्जे से मुक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त आदेश पारित किया है, लेकिन जिले में प्रशासनिक उदासीनता सेे तालाबों पर अवैध कब्जा लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामसभाओं में कभी तीन से छह की संख्या में दिखने वाले तालाब अब एक या दो में सिमट कर रह गए हैं। ज्यादातर तालाबों पर राजस्व विभाग के कुछ लेखपाल का आशीर्वाद होता है तो कुछ पर ग्राम प्रधान अपने चहेतों को पट्टा आवंटित करने से भी बाज नहीं आते।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अलावा सरकार के शासनादेश में भी यह कहा गया है कि तालाब की जमीन का पट्टा नहीं किया जा सकता लेकिन जिले में कागजों में हेरफेर कर पट्टा आवंटित कर दिया जाता है।
राजस्व विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो तीनों तहसीलों में करीब 1262 तालाबों पर अवैध कब्जा है। ज्ञानपुर ब्लाक के गल्हैयां गांव के ग्राम प्रधान रमाशंकर ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर गांव के तालाब को कब्जामुक्त कराने की मांग की।