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नामांकन के बाद प्रत्याशियों ने पकड़ी ग्रामीण क्षेत्रों की राह

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ज्ञानपुर। नामांकन के बाद अब दलगत प्रत्याशियों ने ग्रामीण क्षेत्रों की राह पकड़ कर मतदाताओं को रिझाना शुरू कर दिया है। तो मतदाताओं ने लुभावने वादों से इतर जड़ जमा चुकीं जनसमस्याओं से मुक्ति दिलाने वालों को वरीयता देने की बात कहकर प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ा दी है।
लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होते ही गठबंधन समेत अन्य छोटे-बड़े दलों को प्रत्याशी का चयन और मैदान में उतारने के लिए बहुत सोच-समझ कर कदम उठाना पड़ा। गठबंधन ने शुरुआती दौर में ही प्रत्याशी की घोषणा कर दो अन्य दलों की धड़कनों को बढ़ाने में कसर नहीं छोड़ी। कई दिनों तक चली माथापच्ची पर कांग्रेस और भाजपा ने भी बाहरी प्रत्याशियों को सामने कर मतदाताओं की कानाफूसी तेज कर दी। वहीं एक दर्जन से अधिक छोटे दलों ने भी पूर्व के दिनों की तरह कमर कस कर लोकसभा सीट को अपनी झोली में आने का ख्वाब पाल लिए हैं।
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दूसरी ओर शुरु हुए नामांकन के दौर में महारथी की तरह एक-दूसरे से कमजोर न होने को लेकर नामांकन करने मुख्यालय पहुंचते रहे। बाहरी प्रत्याशियों के लग्जरी वाहनों का काफिला तो गठबंधन स्थानीय लोगों के साथ दमखम दिखाने में कसर नहीं छोड़ी। नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही प्रत्याशी अपने अधीनस्थों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं को रिझाने के लिए कदम से कदम मिलाने का दौर मंगलवार की सुबह से ही देखने को मिला। ग्रामीण अंचलों से राजमार्ग को जोड़ने वाली खस्ताहाल संपर्क मार्गों, शौचालय, आवास, पेयजल, बिजली, पेंशन, उद्योग, जलनिकासी व्यवस्था, स्वच्छता अभियान जैसी समस्याओं से घिर कर मतदाताओं से रुबरु होना विवशता ही देखी गई। इस बार शहरी मतदाताओं की अपेक्षा ग्रामीण मतदाताओं में पूर्व के जनप्रति निधियों से मिली निराशा काफी असर छोड़ रही है।
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