ज्ञानपुर। ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव कामरान रिजवी की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एमएसएमई सेक्टर के 100 दिनों की समीक्षा बैठक हुई। इसमें बैंकर्स की ओर से उदासीनता बरतने पर नाराजगी जताई गई। संयुक्त सचिव ने फटकार लगाते हुए बैंकर्स को अधिक संख्या में मुद्रा लोन देने का निर्देश दिया।
संयुक्त सचिव कमरान रिजवी ने मुद्रा लोन की प्रगति अत्यंत खराब होने पर एलडीएम को फटकार लगाई। प्रशिक्षण एवं कार्ययोजना सही ढंग से नहीं करने पर आरसेटी को फटकार लगाई और हिदायत दी कि पीएम के सपनों का बंटाधार न करें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समीक्षा में पाया गया कि 59 मिनट लोन योजना में केवल सात लाभार्थियों को लाभ दिया गया है। आईआईसीटी के अफसरों को निर्देश दिया कि उद्यमियों संग बैठक कर नई तकनीकी मशीनों के लिए फंडिग का उपयोग करें। उद्यमियों से कहा कि आपकी समस्याओं को प्राथमिकता से निस्तारित किया जाएगा। उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बैंक सहयोग करें, जिससे नई-नई इकाइयां स्थापित हों। एलडीएम को निर्देश दिया कि ऋण संबंधी जो भी आवेदन बैंकों में लंबित हैं उन्हें स्वयं संज्ञान में लेकर निस्तारित करें। इंयियन कारपेट फोरम के अध्यक्ष इम्तियाज अंसारी ने विदेश व्यापार, कस्टम और जीएसटी से संबंधित समस्याएं रखीं, जिस पर सचिव ने कार्यवाई का आश्वासन दिया। मौके पर डीएम राजेंद्र प्रसाद, सीडीओ हरिशंकर सिंह, निदेशक मनरेगा आरपी सिंह, एलडीएम अमिताभ सेन आदि रहे। इसके बाद मनरेगा योजना को आधुनिक तरीके से करने के लिए मंडलीय मनरेगा समीक्षा बैठक हुई। इसमें रिजवी ने मनरेगा के प्रशिक्षकों की ओर से जीआईएस, जीओ मनरेगा, सेक्योर, जन मनरेगा, इनकंपलिट वर्क के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना गांवों की तस्वीर बदल रही है। मनरेगा योजना भारत की पहली योजना है, जो अधीनियम से जोड़ती है। मनरेगा कार्यों का सत्यापन कराकर जॉबकार्ड आदि की फीडिंग और काम मुहैया कराएं।