ज्ञानपुर। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सत्ता में आई भाजपा सरकार में पारदर्शिता सवालों में घिर गई है। भ्रष्टाचार के आरोप में एक बाबू के निलंबित का आदेश तीसरे दिन आया, जबकि दूसरे बाबू का अब तक आदेश नहीं आया। वहीं, जेल की हवा खा चुके फार्मासिस्ट की बहाली सवालों में घिर गई है।
टीजीटी-पीजीटी पेपर लीक मामले में संलिप्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गिर्द बड़गांव के फार्मासिस्ट भारत भूषण सिंह को निदेशालय के निर्देश पर सीएमओ ने तीन दिन पूर्व निलंबित कर दिया था, लेकिन अचानक सोमवार शाम आठ बजे उसे बहाल कर दिया गया। कार्रवाई के तीन दिन के अंदर बहाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं हैं कि जो भी प्रभावशाली होगा उसे संरक्षण मिलेगा, चाहे सत्ता किसी की भी हो। वहीं भ्रष्टाचार के आरोप में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने सीएमओ कार्यालय के दो बाबुओं को निलंबित करने का आदेश दिया था। इसमें एक बाबू अनिल त्रिपाठी के निलंबन का आदेश मंगलवार को आ गया, लेकिन एक बाबू के निलंबन का आदेश अब तक नहीं आया। इससे यह स्पष्ट होने लगा है सत्ता और सचिवालय में जो भी प्रभावशाली है, उसे कहीं न कहीं से राहत जरूर मिलेगी। सीएमओ डॉ. सतीश सिंह ने कहा कि शासन से अनिल त्रिपाठी के निलंबन का आदेश आया है। जालसाज फार्मासिस्ट की बहाली पर चुप हो गए। सीएमओ कार्यालय में दबी जुबां से लोग कहते दिखे कि जिस जालसाज को एसटीएफ ने पेपर आउट में 20 दिन तक जेल में रखा उसे इस तरीके से बहाल कर देना भ्रष्ट व्यवस्था की पोल खोल रहा है।