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राज्य महिला आयोग की सदस्य

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ज्ञानपुर। राज्य महिला आयोग की सदस्य सचिव अनीता सिंह ने महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों के निस्तारण में लेटलतीफी पर नाराजगी जताई। बुधवार को ज्ञानपुर डाकबंगले पर आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं की समस्याएं सुनीं। इस दौरान महिला उत्पीड़न से संबंधित 11 मामले उनके समक्ष आए, जिनमें से छह मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष को संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया।
राज्य महिला आयोग की सदस्य अनीता सिंह बुधवार को सुबह करीब साढ़े दस बजे ज्ञानपुर नगर में बालीपुर स्थित डाकबंगले में पहुंचीं। इसके बाद उन्होंने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ महिला उत्थान से जुड़े मामलों की प्रगति की जानकारी ली। पिछले दौरे में पटल पर आईं शिकायतों के निस्तारण का भी हाल जाना। महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं चलेगा। इसके बाद महिलाओं की समस्याओं की सुनवाई की। इस मौके पर उनके समक्ष विभिन्न मामलों से जुड़े 11 शिकायतें आईं। इनमें से छह मामलों का मौके पर ही निस्तारण करा दिया गया। जबकि अन्य मामलों को उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया। कहा कि अगली समीक्षा बैठक तक ये सभी मामले निस्तारित कर दिए जाने चाहिए। इस दौरान पहुंचीं महिला फरियादियों ने अपनी समस्याएं बताईं। कहा कि उनकी सुनवाई सरकारी दफ्तरों में नहीं होती। इसके बाद उन्होंने गोपीगंज स्थित महिला अल्पावास गृह, महिला चिकित्सालय, समाज कल्याण महिला कल्याण विभाग और स्वयंसेवी संगठनों की ओर से संचालित बालिका गृह एवं वृद्धा आश्रम का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए। इस मौके पर एडीएम, सीओ और जिला प्रोबेशन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। दोपहर बाद उन्होंने गरीब महिलाओं के बीच कंबल वितरण किया।
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ज्ञानपुर। एकल ग्राम पंचायत पेयजल योजनाओं को आधे-अधूरे निर्माण के बाद ही जल निगम ने आठ पंचायतों को हैंडओवर कर दिया। इससे ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं हो पा रहा है। लाखों की लागत से आठ गावों में बनी पेयजल इकाइयां सिर्फ शोपीस बनकर ही रह गई हैं। इसको लेकर विरोध के सुर उठने लगे हैं।
ग्रामीणों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने और पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से एकल ग्राम पंचायत पेयजल समृद्धि योजना लागू की गई। इसके तहत प्रथम चरण में श्रीपुर, प्रतापसिंहपट्टी, दशवतपुर, जखांव, बदरी, सायर, सेऊर और ख्यौंखर गांवों में 35 से लेकर 70 लाख की लागत से पेयजल योजनाओं का निर्माण किया गया। जल निगम की ओर से इनका आधा- अधूरा निर्माण कराने के बाद ही ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कर दिया गया। औराई के सायर गांव में जहां ठूंठ टंकी ही बनाई गई वहीं सेऊर में एकाध बस्ती ही पाइपलाइन से संतृप्त हुई है। यही हाल दूसरे गांवों में देखी जा रही है। गुपचुप तरीके से पेयजल इकाइयों को हैंडओवर करने से इसका लाभ न तो ग्रामीणों को मिल रहा है और न ही पंचायतों को। सेऊर और सायर के प्रधान और सेक्रेटरी ने इसको लेकर विरोध जताया। कहा कि आधी अधूरी परियोजना मिलने से इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि पंचायतों के लिए यह इन योजनाओं का पूर्ण होनी जरूरी है।
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ज्ञानपुर। जल निगम की तमाम योजनाएं कमीशनखोरी की भेट चढ़ जाती हैं। इससे चंद दिनों में योजनाएं या तो बंद हो जाती हैं या चलने लायक ही नहीं रहतीं। एक से दो दशक पूर्व जिले में स्थापित ग्रामीण पेयजल इकाइयां भी मरम्मत के अभाव में बेकार हो गईं हैं। मरम्मत के नाम पर हर साल 25 से 50 लाख शासन से आता है, लेकिन उसकी भी खानापूर्ति ही की जाती है।
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