ज्ञानपुर। गांवों के विकास पर हर महीने होने वाले भारी-भरकम खर्च का लेखाजोखा प्रियासाफ्ट सॉफ्टवेयर से केंद्र सरकार की आईडी पर अपलोड न कराना 66 सचिव और 19 वीडीओ को भारी पड़ गया। पंचायत राज विभाग की ओर से मई माह से सभी का वेतन अग्रिम आदेश तक के लिए रोक दिया गया है। सप्ताह भर में अपलोड न होने पर ग्राम निधि प्रथम खाते पर रोक लगाते हुए गबन का केस दर्ज कराया जाएगा।
राज्य वित्त एवं 14वें वित्त से मिलने वाली रकम से गांवों में नाली, खड़ंजा, मनरेगा समेत अन्य विकास परक कार्य कराए जाते हैं। पूर्व के वर्षों में सभी कामकाज का रिकार्ड फाइलों तक ही सीमित रहती। इसमें फाइलों में हेरफेर कर व्यापक स्तर पर गड़बड़ी जाती थी। बिना काम कराए ही पैसे का आहरण कर लिया जाता। पांच साल पूर्व केंद्र सरकार ने एक-एक काम पर निगरानी रखने के लिए प्रियासाफ्ट साफ्टवेयर को प्रभावी किया। इसमें सभी कार्यों की प्रगति रिपोर्ट अपलोड करना पड़ता है। शासन और प्रशासन की सख्ती के बाद भी ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी की ओर से लापरवाही बरती गई। वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 में 561 ग्राम पंचायतों में मात्र तीन ग्राम पंचायतों ने ही सभी कार्यों का लेखाजोखा प्रियासाफ्ट पर अपलोड किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी ने कुल 85 ग्राम पंचायत और ग्राम विकास अधिकारियों का मई माह से वेतन अग्रिम आदेश तक अवरुद्ध कर दिया। इनमें 66 ग्राम पंचायत अधिकारी और 19 ग्राम विकास अधिकारी शामिल हैं। बीडीओ के माध्यम से पत्र जारी कर सेक्रेटरी और वीडीओ को आगाह किया कि एक सप्ताह के अंदर सभी कार्यों की लेखाबंदी ऑनलाइन दर्ज कराया जाए, अन्यथा उक्त धनराशि को गबन मानते हुए मुकदमा दर्ज कराया जाएगा, साथ ही ग्राम निधि प्रथम के आहरण पर रोक लगाई जाएगी।
जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने कहा कि कई बार निर्देश देने के बाद भी साफ्टवेयर पर डाटा अपलोड नहीं किया गया। इसको संज्ञान में लेते हुए वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है। तय समय पर अपलोड न होने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।