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कांग्रेस और बसपा ही लगा सकी है जीत की हैट्रिक

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ज्ञानपुर। 2019 के लोकसभा चुनाव में भदोही संसदीय सीट से सभी राजनीतिक दलों ने अपने दांवपेच आजमाना शुरू कर दिया है, लेकिन यहां कांग्रेस और बसपा को छोड़कर किसी भी दूसरे दल ने जीत की हैट्रिक नहीं लगाई। पहले मिर्जापुर-भदोही संसदीय सीट होने के दौरान 1952 से 1967 तक लगातार तीन बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी तो 2004 से 2013 तक बसपा ने अपनी छाप छोड़ी। दो-दो बार तो यहां से कई प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, लेकिन वीरेंद्र सिंह सबसे अधिक तीन बार यहां से सांसद चुने गए हैं।
आजादी के बाद पहली बार 1952 में पहली बार चुनाव हुआ। उस समय यह सीट भदोही-मिर्जापुर को जोड़कर बनी थी। पहले चुनाव में कांग्रेस के जान एन विल्सन चुनाव जीते। उसके बाद 1957 से 62 तक वह लगातार दो बार सांसद रहे।
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1962 में भी कांग्रेस के श्यामधर मिश्र ने जीत दर्ज की। 1967 में जनसंघ के वंशनारायण सांसद बने। 1971 में कांग्रेस के अजीज इमाम, 77 में लोकदल के फकीर अली अंसारी, 1980 में फिर अजीज इमाम, 84 में कांग्रेस के ही उमाकांत मिश्र ने जीत दर्ज की। 1989 में जनता दल के यूसुफ बेग तो 1991 में रामलहर में वीरेंद्र सिंह ने भाजपा का खाता खोला। 1996 में सपा से दस्यु सुंदरी फूलन देवी 1998 में वीरेंद्र सिंह, 1999 में फिर फूलन देवी ने जीत दर्ज की। 2002 के उप चुनाव में सपा के रामरति बिंद ने जीत दर्ज की। 2004 में नरेंद्र कुशवाहा बसपा के पहले सांसद बने, हालांकि दो साल में ही उनकी सदस्यता चली गई तो 2007 में हुए उपचुनाव में बसपा के रमेश दूबे जीते।
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2008 में मिर्जापुर- भदोही संसदीय सीट परिसीमन के बाद भदोही सीट हो गई। उसके बाद 2009 में बसपा से गोरखनाथ पांडेय यहां से सांसद चुने गए। 2014 में मोदी लहर में वीरेंद्र सिंह ने एक बार फिर विरोधियों को पटखनी दी। आजादी के बाद से अब तक हुए चुनाव में कांग्रेस और बसपा ही लगातार जीत की हैट्रिक लगा सकी हैं।
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