ज्ञानपुर। टीकाकरणअभियान के सुस्त पड़ जाने से पशुपालकों की चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं जानलेवा बीमारियों की चपेट में आकर दम तोड़ने वाले पशुओं की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है।
पशुपालन विभाग ने 15 मार्च से 30 अप्रैल तक अभियान चलाकर पूरे जनपद में पशुओं का टीकाकरण कराने का दावा किया था। 11 दिन का समय बीत जाने के बाद भी अभियान गति नहीं पकड़ पाया। वहीं ग्रामीण अंचलों में पाले गए पशुओं में तरह-तरह की घातक बीमारियां पशुपालकों को आर्थिक दोहन के लिए विवश कर रही हैं। जबकि नगरीय क्षेत्रों में भी छुट्टा घूम रहे मवेशी खुरपका-मुंहपका, खंगवा, ढांढस रोगों के प्रकोप से पीड़ित हो चुके हैं। सबसे नाजुक स्थिति डीघ क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में बनी है, जहां सरकारी सुविधा से वंचित पशुपालक देशी उपचार पर निर्भर हो चुके हैं। अविलंब पशुपालन विभाग ने सक्रियता न बरती तो औराई क्षेत्र में गत दिनों पशुओं को असमय दम तोड़ने जैसे हालात का सामना करना पड़ सकता है। डीघ क्षेत्र के पशुपालक राकेश बिंद, सुरेश सरोज, कड़ेदीन, भोलाराम, मंगरु, सोहनलाल आदि ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए सचल टीम से टीकाकरण कार्य पूर्ण कराने की मांग की है।